देश की खबरें | सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु के नियमन के लिए राज्यों को समितियां बनानी चाहिए : सीसीआरजीए
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सरकारी विज्ञापनों में विषयवस्तु के नियमन पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक समिति ने कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक समितियों का गठन नहीं किया है और इस देरी को शीर्ष अदालत के आदेशों की अवमानना के तौर पर देखा जा सकता है। सोमवार को जारी एक सरकारी बयान में यह बात कही गयी।
नयी दिल्ली, सात सितंबर सरकारी विज्ञापनों में विषयवस्तु के नियमन पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक समिति ने कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक समितियों का गठन नहीं किया है और इस देरी को शीर्ष अदालत के आदेशों की अवमानना के तौर पर देखा जा सकता है। सोमवार को जारी एक सरकारी बयान में यह बात कही गयी।
इससे पहले शुक्रवार को ‘सरकारी विज्ञापनों में विषयवस्तु की नियमन समिति’ (सीसीआरजीए) की ऑनलाइन बैठक हुई।
सीसीआरजीए को लगता है कि उसके फैसले का अनुपालन नहीं होना गंभीर मामला है।
बयान के अनुसार, ‘‘सोची-समझी राय है कि सीसीआरजीए के आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में समिति संबंधित सरकारों की नोडल एजेंसियों द्वारा आगे विज्ञापन जारी करने पर रोक लगाने को बाध्य हो सकती है, जो इस समिति के दायरे में आता है।’’
बैठक की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने की। इसमें दो अन्य सदस्यों- एशियन फेडरेशन ऑफ एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन के रमेश नारायण और प्रसार भारती बोर्ड के अल्पकालिक सदस्य अशोक कुमार टंडन ने भी भाग लिया।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार राज्यों को सरकारी विज्ञापनों की सामग्री के नियमन पर अपनी-अपनी तीन सदस्यीय समितियों का गठन करना है।
बयान में कहा गया कि कर्नाटक, गोवा, मिजोरम और नगालैंड पहले ही राज्यस्तरीय समितियों का गठन कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्रीय समिति को राज्य सरकार के विज्ञापनों की विषयवस्तु पर निगरानी रखने की सहमति दी है।
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