कोलंबो, तीन जून श्रीलंका के शीर्ष राजनीतिक नेताओं ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के साथ दूसरे दौर की बैठक के दौरान शुक्रवार को संविधान के विवादास्पद 21वें संशोधन के कुछ प्रावधानों पर सहमति व्यक्त की, जिसका उद्देश्य कार्यकारी राष्ट्रपति के संबंध में संसद को अधिकार देना है।
प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के कार्यालय के अनुसार, कुछ प्रस्तावित प्रावधानों पर राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बन गई है। हालांकि, मुख्य विपक्षी एसजेबी ने कहा कि अंतिम मसौदे पर सहमति बनने से पहले 21ए के उनके संस्करण पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।
संविधान में 21वें संशोधन से 20 ए प्रावधान के रद्द करने की उम्मीद है, जो संसद को मजबूत करने वाले 19वें संशोधन को समाप्त करने के बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को निरंकुश शक्तियां प्रदान करता है।
द्वीप राष्ट्र की संसद को प्रमुख संस्थानों का अराजनीतिकरण करते हुए राष्ट्रपति से कुछ शक्तियों को वापस लेना है।
मुख्य विपक्षी एसजेबी का कहना है कि 21ए में राष्ट्रपति को किसी भी मंत्रालय को संभालने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
गत 27 मई को, प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात की थी और 21वें संशोधन के मसौदे पर चर्चा की थी। बैठक का उद्देश्य पार्टी नेताओं को संशोधन के मसौदे के संबंध में अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत करने की अनुमति देना था।
हालांकि, इस शुक्रवार के लिए अंतिम बैठक निर्धारित की गई थी।
विक्रमसिंघे ने बैठक के बाद ट्वीट किया, "पार्टी नेताओं के साथ दूसरे दौर की चर्चा आज हुई और 21वें संशोधन के संबंध में आम सहमति बनी। हालांकि, संशोधन एसजेबी के संवैधानिक संशोधन के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के आधार का विषय हो सकता है।’’
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