रामेश्वरम (तमिलनाडु), 18 अक्टूबर कच्चातिवू द्वीप के पास मछली पकड़ रहे कुछ मछुआरों को श्रीलंकाई नौसैनिकों ने कथित तौर पर वहां से हटने के लिये मजबूर कर दिया, जिसके बाद तमिलनाडु के 4,000 से अधिक मछुआरों को खाली हाथ ही लौटना पड़ गया। मछुआरा संघ के नेताओं ने रविवार को यह जानकारी दी।
कच्चातिवू, पाक जलडमरूमध्य में स्थित एक द्वीप है, जिसे 1974 में भारत ने श्रीलंका को सौंप दिया था।
यह घटना शनिवार रात हुई, जब भारतीय मछुआरे धनुषकोडी (तमिलनाडु) और कच्चातिवू के बीच मछली पकड़ रहे थे। इस दौरान वहां हथियारों से लैस श्रीलंकाई नौसैनिक गश्ती नौकाओं में पहुंचे और करीब 600 यांत्रिक नौकाओं में से करीब 50 को वहां से पीछे हटने के लिये मजबूर कर दिया।
मछुआरा संघ के नेता एस अमृत ने दावा किया कि श्रलंकाई नौसेना ने मछुआरों को पीछे हटने के लिये मजबूर कर दिया, जिस कारण उन लोगों को बगैर मछली पकड़े ही लौटना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इससे उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ है।
यह भी पढ़े | Corona Pandemic: केवल लंग्स नहीं मल्टी ऑर्गन डिजीज बन गई है कोरोना महामारी, सावधान रहने की है जरूरत.
उन्होंने राज्य एवं केंद्र सरकार से यह मुद्दा श्रीलंका सरकार के समक्ष उठाने का अनुरोध किया, ताकि तमिलनाडु के मुछआरों की चिंता दूर हो सके।
इस बीच, मछुआरों के एक समूह ने यहां अनूठे तरीके से प्रदर्शन किया। वे भिक्षापात्र लिये हुए थे और मछली पकड़ने के लिये प्रतिबंधित जाल का इस्तेमाल करने वाले मछुआरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY