देश की खबरें | सोज ने जम्मू कश्मीर प्रशासन पर शीर्ष अदालत में झूठ बोलने का आरोप लगाया, सरकार ने किया खंडन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

श्रीनगर, 30 जुलाई पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज की आवाजाही पर कोई प्राबंदी नहीं होने की बात जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा उच्चतम न्यायालय में कहे जाने के बाद भी वरिष्ठ कांग्रेस बृहस्पतिवार को घर में नजरबंद रहे।

लेकिन जम्मू कश्मीर प्रशासन के प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा कि शीर्ष अदालत में झूठ बोलने का प्रश्न ही नहीं उठता और दोहराया कि सोज स्वतंत्र हैं।

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उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री सैफुद्दीन सोज गिरफ्तारी या हिरासत में नहीं हैं। वह अक्टूबर और दिसंबर दो बार दिल्ली हो आये। वह जहां भी जाना चाहें, सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया के तहत जाने के लिए स्वतंत्र हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय में झूठ बोलने का प्रश्न ही नहीं है।’’

अपने निवास की दीवार के पीछे से कुछ देर के लिए संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सोज ने कहा कि शीर्ष अदालत में जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा ‘‘झूठ’’ बोले जाने को लेकर वह फिर न्यायालय की ओर रुख करेंगे।

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उन्होंने कहा, ‘‘ अब वह उच्चतम न्यायालय से झूठ बोल रहे हैं कि मैं स्वतंत्र हूं। मैं न्यायालय जाऊंगा, चाहे जो भी नतीजा हो।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि वह कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन उनके निवास पर तैनात पुलिसकर्मी उन्हें बाहर जाने से रोक रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ यह जगह पुलिस राज्य बन गयी है।’’

सादा वर्दी में एक सुरक्षा अधिकारी वरिष्ठ कांग्रेस नेता को खींचकर संवाददताओं से दूर ले गया तथा उसने वर्दी पहने अन्य कर्मियों से पत्रकारों को वहां से हटाने को कहा।

इस अज्ञात अधिकारी ने कहा, ‘‘ यहां से उन्हें भगाओ।’’

कांग्रेस नेता अधिकारी से यह कहते हुए सुनाई दिए, ‘‘मुझे हाथ मत लगाओ।’’

इस बीच पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह कहते हुए सोज की तत्काल रिहाई की मांग की कि राजनीतिक नेताओं को ‘‘अवैध रूप से बंदी’’ बनाने से देश के ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ बिना किसी ठोस आधार के राजनीतिक नेताओं को अवैध रूप से बंदी बनाने से देश के ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है।’’

इससे पहले सोज ने कहा था कि पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर (पूर्व राज्य) के विशेष दर्जे को समाप्त किये जाने के बाद से ‘उन्हें अवैध रूप से नजरबंद’ रखने को लेकर वह सरकार पर मुकदमा करेंगे। उन्होंने उच्चतम न्यायालय में केंद्र के इस जवाब को ‘झूठ’ बताया कि वह नजरबंद नहीं हैं।

सोज ने यहां जारी एक बयान में कहा था, ‘‘मैं उच्चतम न्यायालय में सरकार द्वारा अपनाये गये इस रुख पर कड़ा ऐतराज करता हूं कि पांच अगस्त, 2019 से मुझे नजरबंद नहीं किया गया था और न ही मुझ पर पाबंदियां लगायी गयी थीं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने ‘झूठ’ का रास्ता अख्तियार किया, जबकि उसने मुझे पांच अगस्त, 2019 से गैर कानूनी तरीके से बंदी बना लिया था।’’

उन्होंने कहा था, ‘‘ इस दौरान मुझे अपने परिसर से बाहर नहीं जाने दिया गया। मैं दो बार परिसर से बाहर गया जब मुझे 17-21 सितंबर 2019 के बीच अपनी बीमार बहन को देखने दिल्ली जाना पड़ा, और 15-21 दिसंबर , 2019 के बीच मुझे चिकित्सकीय सलाह के लिए बाहर जाना पड़ा। पांच अगस्त, 2019 के बाद मैं जब भी बाहर गया तो मुझे सरकार से इजाजत लेनी पड़ी।’’

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ पांच अगस्त, 2019 से मुझे गैर कानूनी तरीके से नजरबंद रखने के लिए मैंने सरकार पर मुकदमा करने का निर्णय लिया है। संविधान के तहत मैं जिन नागरिक अधिकारों का हकदार हूं, उन्हें निलंबित रखने और मुझे बंदी बनाने को लेकर भी मैं क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर करूंगा।’’

उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कहा था कि सोज को ‘‘कभी नजरबंद नहीं किया गया था’’ और ‘‘सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद उनकी आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं थी’’।

सोज की पत्नी की याचिका के जवाब में सरकार ने यह हलफनामा दिया। उनकी पत्नी ने याचिका में सोज को ‘‘अवैध हिरासत’’ से रिहा करने तथा अदालत के समक्ष उन्हें पेश करने की मांग की है।

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