जरुरी जानकारी | कम आपूर्ति के बीच सोयाबीन, सीपीओ, पामोलीन, बिनौला में सुधार

नयी दिल्ली, 23 फरवरी खाद्यतेलों का आयात कम होने की वजह से आपूर्ति कम होने के बीच दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को सोयाबीन तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल कीमतें मजबूत बंद हुई। जबकि ऊंची लागत के कारण मांग कमजोर होने से सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट रही।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज मामूली सुधार के साथ बंद हुआ जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात गिरावट थी और अभी भी यहां गिरावट है।

उन्होंने कहा कि बंदरगाह पर आयात वाले खाद्यतेल की आपूर्ति कम है। पाम, पामोलीन के महंगा होने के कारण इन तेलों का आयात प्रभावित हुआ है। इन तेलों का देश के कुल खाद्यतेल आयात में हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत की है। आयात कम होने के कारण सारा दवाब अब सॉफ्ट आयल पर आ गया है जिसकी वजह से सोयाबीन डीगम यहां आयात भाव से 8-9 प्रतिशत ऊंचे दाम पर बिक रहा है। यह आपूर्ति 15-20 मार्च तक कम रहने की संभावना है।

सूत्रों ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के हिसाब से सरसों तेल की लागत 125-130 रुपये किलो बैठती है। दूसरी ओर आयातित तेल सोयाबीन डीगम के आयात की लागत (शुल्क समेत) 81 रुपये किलो बैठती है। अब सरसों का रिफाइंड बनने के बाद भी उसकी लागत सोयाबीन डीगम से महंगा ही बैठेगी। सरसों तो तभी खप सकता है जब इसके रिफाइंड की लागत सोयाबीन डीगम से कम होगी जो निकट भविष्य में कहीं से संभव नहीं दिख रहा है।

उन्होंने कहा कि आंकड़ों को देखें तो पता लगता है कि पाम, पामोलीन का भाव सूरजमुखी और सोयाबीन तेल से कहीं महंगा है। इस हिसाब से तो उपभोक्ताओं को भी सूरजमुखी और सोयाबीन सस्ता मिलना चाहिये लेकिन सरकार को अपने तंत्र के माध्यम से इस बात की जानकारी लेनी चाहिये कि क्या उपभोक्ताओं को ये तेल सस्ते में मिल रहा है। अगर नहीं मिल रहा है तो उसकी वजह क्या है ?

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत बंद होने के कारण पाम, पामोलीन में सुधार है। आपूर्ति की कमी की वजह से सोयाबीन डीगम तेल महंगा होने के कारण सोयाबीन तेल तिलहन में भी सुधार है जबकि नरमतेलों की तेजी के अनुरूप बिनौलातेल कीमतों में भी मजबूती है।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर लागत महंगा होने की वजह से मांग प्रभावित रहने के कारण सरसों और मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में गिरावट रही।

सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सरसों की आवक लगातार बढ़ रही है और जल्द ही इसकी आवक 10 लाख बोरी तक पहुंचने की संभावना है।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,225-5275 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,025-6,300 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,700 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,195-2,470 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,670-1,770 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,670 -1,775 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,350 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,550 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,635-4,665 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,445-4,485 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।

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