सियोल के विदेश मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार को आयोजित एक जन सुनवाई में यह योजना सामने आई। युद्ध पीड़ितों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए जापान से हर्जाने की मांग की।
सियोल और तोक्यो के बीच संबंध तब से और बिगड़ गये जब 2018 में दक्षिण कोरिया के उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत के फैसलों को बरकरार रखते हुए निप्पोन स्टील तथा मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज को कोरियाई बंधुआ मजदूरों को मुआवजा देने का आदेश दिया।
कंपनियों ने आदेशों को पूरा करने से इनकार कर दिया और वादियों ने कंपनियों को मुआवजा प्रदान करने के लिहाज से अपनी स्थानीय संपत्तियों को बेचने के लिए बाध्य करने के उद्देश्य से कानूनी कदम उठाये हैं। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों को डर है कि इस प्रक्रिया से सियोल और टोक्यो के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
पीड़ितों ने जापानी कंपनियों से माफी की मांग भी की है।
कोरियाई प्रायद्वीप में 1910 से 1945 तक जापान के क्रूर शासन के संबंध में शिकायतों से दोनों देशों के संबंधों में खटास बढ़ गयी। उस समय हजारों कोरियाई लोगों को जापानी कंपनियों के लिए बंधुआ मजदूर बनाया गया।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यून सुक येओल जापान के साथ संबंध सुधारने के इच्छुक रहे हैं। उत्तर कोरिया की ओर से बढ़ते परमाणु खतरे के मद्देनजर वे वाशिंगटन के साथ मजबूत त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग रखते हैं।
एपी
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