नयी दिल्ली, 26 अगस्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को उस याचिका पर अपनी सहमति देने से इंकार कर दिया, जिसमें बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी गई थी। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में फैसले को लेकर उच्चतम न्यायालय के खिलाफ कथित तौर पर ‘‘अपमानजनक एवं निंदनीय’’ बयान देने के लिए उन पर यह कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी गई थी।
कुछ दिन पहले ही अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने अवमानना कार्यवाही शुरू करने की अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा था कि भास्कर का बयान मुद्दे के बारे में उनकी ‘‘धारणा’’ प्रतीत होती है।
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मेहता ने वकील अनुज सक्सेना को लिखे पत्र में कहा, ‘‘भारत के अटॉर्नी जनरल ने 21 अगस्त को सहमति देने से इंकार करते हुए इसके कारण भी बताए थे...।’’
उन्होंने पत्र में लिखा, ‘‘भारत के अटॉर्नी जनरल ने इस मामले में सहमति देने से इंकार करते हुए अपने पत्र में इसका विस्तृत कारण बताये थे, उसके मद्देनजर... मुझसे किया गया आग्रह गलत है।’’
वेणुगोपाल के इंकार करने के बाद सक्सेना ने भास्कर के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए याचिकाकर्ता उषा शेट्टी की तरफ से सॉलिसीटर जनरल से सहमति मांगी थी।
किसी व्यक्ति के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए अदालत की अवमानना कानून, 1971 की धारा 15 के तहत अटॉर्नी जनरल या सॉलिसीटर जनरल की सहमति जरूरी होती है।
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