वाराणसी (उप्र), 27 जून केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि "भारत में समाजवाद की कोई आवश्यकता नहीं है", साथ ही उन्होंने कहा कि "धर्मनिरपेक्षता हमारी संस्कृति का मूल नहीं है"।
चौहान की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) ने बृहस्पतिवार को संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों की समीक्षा करने का आह्वान करते हुए कहा था कि इन्हें आपातकाल के दौरान शामिल किया गया था और ये कभी भी डॉ बी आर आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हिस्सा नहीं थे।
आपातकाल के 50 साल पूरे होने के अवसर पर वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम में चौहान ने कहा, ‘‘भारत में समाजवाद की जरूरत नहीं है... धर्मनिरपेक्ष हमारी संस्कृति का मूल नहीं है और इस पर जरूर विचार होना चाहिए।’’
आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान में "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" शब्दों पर चर्चा का आह्वान किया था।
उन्होंने कहा था, "संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े गए थे। इस पर चर्चा होनी चाहिए कि उन्हें रहना चाहिए या नहीं।" उन्होंने कहा कि ये शब्द मूल रूप से संविधान में नहीं थे।
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता राजेंद्र चौधरी ने संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों को हटाने के सुझाव के लिए भाजपा और आरएसएस की आलोचना की।
चौधरी ने ‘पीटीआई-’ से कहा, "ये बयान केवल यह साबित करते हैं कि संघ-भाजपा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते और संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।"
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