देश की खबरें | लोक-लुभावने कदमों पर आधारित ‘शॉर्ट-कट’ राजनीति देश को तबाह कर सकती है: मोदी

देवघर, 12 जुलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि लोक-लुभावने कदमों पर आधारित ‘शॉर्ट-कट’ राजनीति देश का ‘शार्ट सर्किट’ (तबाह) कर सकती है।

प्रधानमंत्री ने यहां करीब 16,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने के बाद भारतीय जनता पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और ‘शॉर्ट कट की राजनीति’ से ऐसी परियोजनाओं को पूरा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘देश के सामने शॉर्ट-कट राजनीति की बड़ी चुनौती है, लेकिन यह भी बड़ी सच्चाई है कि जिस देश की राजनीति शॉर्ट-कट पर आधारित हो, वहां शॉर्ट-सर्किट हो सकता है। यह देश को तबाह कर सकती है।’’

मोदी ने देवघर में पवित्र श्रावणी मेला से पहले कहा कि आस्था, अध्यात्म और तीर्थ यात्रा की भूमि है जिसने ‘‘हमे बेहतर समाज और देश बनाया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार आस्था, अध्यात्म और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े स्थानों पर आधुनिक अवसरंचना देने के लिए निवेश कर रही है। उन्होंने इसके साथ ही अयोध्या, काशी विश्वनाथ और यहां स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर का संदर्भ दिया।

उन्होंने लोगों से लोक-लुभावन घोषणाओं की राजनीति से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि देश के समक्ष चुनौतिया हैं।

मोदी ने कहा कि ‘‘देश, ‘शॉर्ट कट’ की राजनीति की बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि जिन देशों की राजनीति ‘शॉर्ट कट’ पर आधारित होती, वे देश को तबाह कर सकती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत आसान है कि बिना नतीजों के सोचे लोक लुभावन कदमों और ‘शॉर्ट कट की राजनीति’ से लोगों के मतों को हासिल कर लिया जाए।’’

उन्होंने रेखांकित किया देशवासियों ने आजादी के 100 की ओर बढ़ते कदम के साथ देश को नयी ऊंचाई पर ले जाने का संकल् ले लिया है। उन्होंने कहा कि इसे कड़ी मेहनत कर हासिल किया जा सकता है।

मोदी ने कहा जो ‘‘ शार्ट कर्ट की राजनीति’’करते हैं वे आदर्श हवाई अड्डे, नए राजमार्ग और चिकित्सा महाविद्यालय बनाने के लिए कड़ी मेहनत नहीं कर सकते।

प्रधानमंत्री ने उनके द्वारा उद्घाटन की गई परियोजनाओं के बारे में कहा कि केंद्र ने आधारशिला रखने के साथ ही इन परियोजनाओं के उद्घाटन की तारीख सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि यह भाजपा का ‘शासन मॉडल’ है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले परियोजना की घोषणा एक सरकार करती थी, शिलान्यास दूसरी सरकार करती थी और अंतत: कई सरकारों के जाने के बाद उसपर नजर जाती थी।

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