चंडीगढ़, 24 अक्टूबर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह पंजाब विधानसभा की चार सीटों के लिए 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में भाग नहीं लेगा।
यह फैसला शिरोमणि अकाली दल की कार्यसमिति और पार्टी के जिला अध्यक्षों की यहां हुई एक आपात बैठक में लिया गया।
यह कदम शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को अकाल तख्त से कोई अस्थायी राहत नहीं मिलने के एक दिन बाद उठाया गया है। अकाल तख्त ने बादल को 2007 से 2017 तक उनकी पार्टी और सरकार द्वारा की गई "गलतियों" के लिए ‘‘तनखैया’’ (धार्मिक कदाचार का दोषी) घोषित किया है।
प्रदेश की चार विधानसभा सीटों - गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल और बरनाला - पर 13 नवंबर को उपचुनाव होंगे।
इन क्षेत्रों के विधायकों के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उपचुनाव जरूरी हो गए थे।
पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हमने निर्णय लिया है कि हम पंथ के हितों और पंथिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए चार विधानसभा सीटों के उपचुनावों से खुद को दूर रखेंगे।"
उन्होंने कहा कि बैठक में इस संबंध में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया।
इससे पहले, मंगलवार को शिअद के एक प्रतिनिधिमंडल ने जत्थेदार से मुलाकात की और उनसे पंजाब में चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव की खातिर बादल को पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व करने के लिए छूट देने का आग्रह किया था।
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने बुधवार को कहा था कि धार्मिक कदाचार का दोषी तब तक ‘‘तनखैया’’ ही रहता है जब तक उसे धार्मिक सजा नहीं दी जाती।
सिखों के सर्वोच्च धार्मिक निकाय अकाल तख्त ने 30 अगस्त को सुखबीर बादल को उनकी पार्टी और उनकी सरकार द्वारा 2007 से 2017 तक की गई "गलतियों" के लिए ‘‘तनखैया’’ घोषित किया था।
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