देश की खबरें | शांता गोखले को नौवें वाणी फाउंडेशन प्रतिष्ठित अनुवादक पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा

नयी दिल्ली, 30 जनवरी प्रख्यात लेखिका और अनुवादक शांता गोखले को मराठी और अंग्रेजी ओं के बीच दूरियां पाटने में उनके योगदान के लिए नौवें वाणी फाउंडेशन प्रतिष्ठित अनुवादक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

यह पुरस्कार गोखले को तीन फरवरी को जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) के समापन के मौके पर प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार स्वरूप उन्हें एक लाख रुपए की नकद राशि, एक ट्रॉफी और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जायेगा।

लेखिका और जेएलएफ की सह-संस्थापक नमिता गोखले ने कहा, ‘‘हम उत्कृष्ट लेखिका, अनुवादक, पत्रकार और रंगमंच समीक्षक शांता गोखले को नौवें वाणी फाउंडेशन अनुवादक पुरस्कार से नवाजे जाने की घोषणा करते हुए सम्मानित महसूस कर रहे हैं और उनका काम कई दशकों के समर्पण और मेहनत का नतीजा है।’’

चौदह अगस्त, 1939 को महाराष्ट्र के दहानु में जन्मी गोखले ने मराठी और अंग्रेजी दोनों साहित्यिक क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनके बहुमुखी योगदान में उपन्यास, संस्मरण, आलोचनात्मक निबंध और संपादकीय कार्य शामिल हैं, जिसने उन्हें भारतीय कला और संस्कृति की दुनिया में एक प्रमुख व्यक्तित्व बना दिया।

उन्होंने लक्ष्मीबाई तिलक की ‘‘स्मृतिचित्र: द मेमोयर्स ऑफ ए स्पिरिटेड वाइफ’’ और उद्धव जे शेलके के उपन्यास ‘‘कौटिक ऑन एम्बर्स’’ (धाग) का अनुवाद किया है। इनके अलावा उन्होंने विजय तेंदुलकर, महेश एलकुंचवार, सतीश अलेकर, जी पी देशपांडे, प्रेमानंद गजवी और मकरंद साठे के नाटकों का भी अनुवाद किया है।

गोखले को उनके उपन्यास ‘‘रीता वेलिंकर’’ (1995) और ‘‘त्या वर्षी’’ (2004) के लिए भी जाना जाता है।

उनका तीसरा उपन्यास, ‘‘निर्मला पाटिल यांचे आत्मकथन’’ दो साल पहले प्रकाशित हुआ था।

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