नयी दिल्ली, छह अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने खाने के बिल पर सेवा शुल्क लगाये जाने के मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की ओर से दायर हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए होटल एवं रेस्तरां मालिकों के संघ को दो सप्ताह का समय दिया है।
उच्च न्यायालय फुड बिल पर सेवा शुल्क लगाने पर रोक संबंधी सीसीपीए के चार जुलाई के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) और फेडरेशन ऑफ होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) की याचिकाओं की सोमवार को सुनवाई कर रही थी।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने मामले को नवम्बर में सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हुए कहा, ‘‘संबंधित याचिकाओं पर सीसीपीए की ओर से दायर हलफनामे का जवाब देने के लिए याचिकाकर्ताओं ने कुछ मोहलत का अनुरोध किया था, और इसे स्वीकार करते हुए दो सप्ताह का समय दिया जाता है।’’
एनआरएआई ने उच्च न्यायालय के समक्ष दावा किया है कि चार जुलाई के आदेश के तहत सीसीपीए का प्रतिबंध "मनमाना, अस्थिर है और इसे रद्द किया जाना चाहिए", क्योंकि यह तथ्यों और परिस्थितियों की सराहना के बिना लगाया गया था।
एनआरएआई की याचिका में कहा गया है, "आतिथ्य उद्योग में सेवा शुल्क की वसूली 80 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है, जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि शीर्ष अदालत ने 1964 में इस अवधारणा का संज्ञान लिया था।"
केंद्र और सीसीपीए ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी है कि होटल और रेस्तरां खुले तौर पर दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे थे और उपभोक्ताओं से वैसी स्थिति में भी भोजन के बिलों पर सेवा शुल्क अनैच्छिक रूप से वसूल रहे थे, जब उपभोक्ता सेवाओं से असंतुष्ट थे।
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