जरुरी जानकारी | सेबी ने तरजीही इश्यू के मूल्य निर्धारण की संशोधित रूपरेखा पेश की

नयी दिल्ली, दो जुलाई बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कोरोना वायरस महामारी के बीच कंपनियों के लिये कोष जुटाना आसान बनाने के लिये शेयरों के तरजीही इश्यू की मूल्य निर्धारण पद्धति को आसान बनाने वाली संशोधित रूपरेखा पेश की है।

इसके अलावा सेबी ने कुछ शर्तों के साथ खुले प्रस्ताव के दौरान थोक या ब्लॉक में सौदों के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज निपटान प्रक्रिया में शेयरों को खरीदने की भी अनुमति दी है।

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सेबी बोर्ड द्वारा पिछले सप्ताह इस संबंध में प्रस्तावों को मंजूरी दिये जाने के बाद संशोधित रूपरेखा पेश की गयी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तरजीही इश्यू के लिये मूल्य निर्धारण दिशानिर्देशों में बदलाव से प्रवर्तकों और निवेशकों को उन कंपनियों में धन लगाने में मदद मिलेगी, जो महामारी के कारण विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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सेबी ने बुधवार को जारी एक अधिसूचना में तरजीही इश्यू के संबंध में मूल्य निर्धारण पद्धति के लिये एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान किया है। ऐसे मामलों में जहां नये विकल्प का प्रयोग किया जाता है, ऐसे शेयरों के लिए तीन-वर्षीय लॉक-इन अवधि की आवश्यकता होगी।

मूल्य निर्धारण का यह विकल्प एक जुलाई से 31 दिसंबर के बीच के तरजीही इश्यू के लिये उपलब्ध होगा।

इस विकल्प के तहत, जिन शेयरों में बाजार में अच्छी खरीद-फरोख्त होती है उनके मामलों में तरजीही इश्यू के तहत आवंटित शेयरों का मूल्य इश्यू जारी होने से पहले के दो उच्च स्तरों में से किसी के अधिकतम से कम नहीं होना चाहिये।

इन दो स्तरों में एक 12 सप्ताह के दौरान संबंधित शेयर के मात्रा आधारित औसत मूल्य के साप्ताहिक उच्च स्तर और निम्न स्तर का औसत अथवा दो सप्ताह के दौरान मात्रा आधारित औसत मूल्य के साप्ताहिक उच्च स्तर और निम्न स्तर का औसत है।

सेबी ने विभिन्न संबंधित पक्षों द्वारा प्रतिभूति बाजार से धन जुटाने के नियमनों को तात्कालिक आधार पर उदार बनाये जाने की मांग के बाद यह संशोधन किया है।

सेबी ने एक अलग अधिसूचना में खुले प्रस्ताव के दौरान थोक या ब्लॉक में होने वाले सौदों के माध्यम से शेयरों की खरीद की अनुमति दी है।

बाजार नियामक ने इन रूपरेखाओं को प्रभावी करने के लिये आईसीडीआर (कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स का इश्यू) और एसएएसटी (स्टॉक एंड टेकओवर्स का सब्स्टीट्यूशनल एक्विजिशन) रेग्युलेशन में संशोधन किया है।

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