नयी दिल्ली, 13 सितंबर शोधकर्ताओं ने कई ऐसे नए जीन्स का पता लगाया है, जिनकी वजह से लोगों को बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर का खतरा होता है।
इस नवीनतम शोध के जरिए बड़ी आंत के कैंसर जैसी जानलेवा एवं घातक बीमारी की रोकथाम और उपचार के प्रयासों में सहायता मिल सकती है।
अमेरिका में वेंडरबिल्ट-इनग्राम कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं ने वंशाणुओं (जीन्स) की खोज को मजबूत करने के लिए एक बड़ा ट्रांसक्रिप्टोमिक-वाइड एसोसिएशन अध्ययन (टीडब्ल्यूएएस) किया और इसके लिए स्प्लिसिंग-टीडब्ल्यूएएस नामक वैकल्पिक दृष्टिकोण रखा गया।
टीडब्ल्यूएएस एक आनुवंशिक पद्धति है, जिसका उपयोग वंशाणु के आनुवंशिक घटकों और किसी लक्षण के आनुवंशिक घटकों की तुलना करने के लिए किया जा सकता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि दोनों घटकों के बीच कोई संबंध मौजूद है या नहीं।
अमेरिका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया है कि पहले सामने नहीं आए दो जीन, टीआरपीएसआई और एमईटीआरएनएल के लिए ऑन्कोजेनिक भूमिकाएं और हाल ही में रिपोर्ट किए गए एक अन्य जीन, सी14ओआरएफएल66 के साथ कैंसर के जोखिम की पुष्टि की गई।
मेडिसिन और बायोमेडिकल इंफॉर्मेटिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर एवं वरिष्ठ लेखक ज़िंगी गुओ ने कहा, ‘‘हमारे अध्ययन में, हमने नए बड़े आरएनए-सीक्यू आंकड़ों का उपयोग किया और नवीन वंशाणु खोज को बढ़ाने के लिए स्प्लिसिंग-टीडब्ल्यूएएस के साथ-साथ टीडब्ल्यूएएस दृष्टिकोण को नियोजित किया।’’
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