नयी दिल्ली, 10 जुलाई कोविड-19 महामारी के दौरान अध्ययनों की भरमार के दबाव के चलते चिकित्सा और वैज्ञानिक पत्रिकाएं अध्ययनों की समीक्षा और त्वरित प्रकाशन के लिए नयी प्रक्रियाएं अपना रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पत्रिकाएं अनुसंधान लेखों का बारीकी से अध्ययन करने और उनकी समीक्षा की गति तेज करने के लिए त्वरित समीक्षा करने वाले स्वयंसेवकों की मदद भी ले रही हैं।
पत्रिकाओं पर मौजूदा भार का उदाहरण देते हुए ‘जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ के मुख्य संपादक हॉवर्ड बाउशनेर ने उल्लेख किया कि जनवरी से लेकर जून 2020 तक प्रकाशन के पास 11 हजार से अधिक पाण्डुलिपि आईं, जबकि 2019 में इसी अवधि में इनकी संख्या लगभग चार हजार थी।
जब किसी पत्रिका को कोई अनुसंधान पाण्डुलिपि सौंपी जाती है तो संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से इसकी वैज्ञानिक वैधता का मूल्यांकन करने, इसके प्रभाव का पता लगाने और प्रकाशन के लिए इसकी पात्रता पर मत व्यक्त करने के लिए कहा जाता है।
पिछले महीने, ‘जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ में प्रकाशित एक संपादकीय में बाउशनेर और उनके सहकर्मियों ने कहा कि अध्ययन के वैज्ञानिक आधार का मूल्यांकन करने में संबंधित विषय के समीक्षकों की राय बेहद महत्वपूर्ण होती है।
एडिटोरियल, नेचर जर्नल्स की उपाध्यक्ष रितु ढांड ने कहा कि महामारी ने समीक्षा प्रक्रिया को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
उन्होंने पीटीआई- से मेल पर कहा, ‘‘अनुसंधान की यह संख्या और गति अध्ययन के आकलन और प्रकाशन से संबंधित सभी पक्षों के लिए निश्चित तौर पर चुनौतीपूर्ण है।’’
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