नयी दिल्ली, 23 मई उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और असम सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य के आसपास के क्षेत्र को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने और सभी अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति बी.आर.गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने असम में वन्यजीव अभयारण्य के संबंध में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
पीठ ने कहा, “नोटिस जारी करें, जिसका जवाब 12 जुलाई 2023 तक दिया जाए। असम राज्य के लिये इसे स्थायी वकील को दिए जाने की छूट दी जाती है।”
शीर्ष अदालत पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बिना किसी और देरी के पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य की सीमा का सटीक सीमांकन करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिका में कहा गया है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 1998 में अधिसूचित अभयारण्य की सीमा को अभी तक सटीक रूप से चिह्नित नहीं किया गया है और अभयारण्य क्षेत्र के एक हिस्से, खास भूमि (सरकार नियंत्रित भूमि) का नियंत्रण जिला प्रशासन द्वारा वन विभाग को अभी सौंपा जाना है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने 11 दिसंबर, 2018 के उच्चतम न्यायालय के आदेश की घोर अवहेलना करते हुए अभयारण्य के आसपास के क्षेत्र को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) घोषित करने के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं किए हैं।
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