संयुक्त राष्ट्र, पांच नवंबर पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने पर संयुक्त राष्ट्र और कुछ सदस्य देशों ने अफसोस जताया है और कहा है कि वे जलवायु के मुद्दे पर कार्रवाई को गति देने के लिए सभी अमेरिकी हितधारकों और विश्व भर में साझेदारों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अमेरिका चार नवंबर को औपचारिक रूप से ‘जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते 2015’ से हट गया।
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संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सचिवालय- ‘यूएनएफसीसीसी’ ने जलवायु के मुद्दे पर कार्रवाई को गति देने के लिए अमेरिका और उसके बाहर मौजूद हितधारकों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र ने चिली, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन के साथ संयुक्त वक्तव्य जारी कर कहा, “हमें अफसोस है कि आज अमेरिका औपचारिक रूप से पेरिस समझौते से बाहर हो गया।”
पेरिस समझौते के तहत देशों को तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से कम वृद्धि रखने और वैश्विक ऊष्मा को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न होने देने का संकल्प लेना होता है।
समझौते से अमेरिका के पीछे हटने के बारे में पूछे जाने पर संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक ने न्यूयार्क में संवाददाताओं से कहा, “मजबूत और सक्रिय पेरिस समझौते के प्रति हमारा विश्वास और समर्थन दृढ है।”
अगस्त 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते से पीछे हटने के फैसले से संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अवगत कराया था।
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