लखनऊ, 25 जून उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 1975 में देश में लागू आपातकाल की बरसी पर रविवार को भारत के महान लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए आपातकाल का पुरजोर विरोध करने वाले सभी लोगों को नमन किया।
वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता रामगोविंद चौधरी ने आपातकाल को देश पर एक काला धब्बा करार देते हुए कहा कि इस वक्त देश में आपातकाल से भी बदतर स्थिति हो गई है और सभी को एकजुट होकर इस स्थिति से निपटना होगा।
रविवार को आपातकाल की बरसी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ट्वीट में कहा, ''भारत के महान लोकतंत्र को अक्षुण्ण रखने के लिए बिना डरे, बिना डिगे, बिना झुके क्रूर तानाशाही का प्रखर प्रतिकार करने वाले समस्त हुतात्माओं को नमन।''
इसी ट्वीट में योगी ने एक तस्वीर साझा की जिसमें 25 जून 1975 'आपातकाल एक कलंक' की इबारत को प्रमुखता से लिखा गया है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आपातकाल की बरसी के मौके पर किए गए एक ट्वीट में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ''कांग्रेस का मतलब आपातकाल, भाजपा का मतलब अमृतकाल! कांग्रेस को तानाशाही में, भाजपा को लोकतंत्रशाही में विश्वास।''
एक अन्य ट्वीट में मौर्य ने कहा कि ''कांग्रेस के डीएनए में लोकतंत्र नहीं तानाशाही है! कांग्रेस मुक्त भारत देश और लोकतंत्र के लिए जरूरी।''
प्रदेश के दूसरे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने ट्वीट में कहा, ''भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के सबसे काले अध्याय (25 जून, 1975 को लागू आपातकाल) के विरोध में उठी हर आवाज को सादर नमन।''
इस बीच सपा के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता रामगोविन्द चौधरी ने बलिया जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में आपातकाल को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।
आपात काल की बरसी पर लोकतंत्र सेनानियों द्वारा बलिया शहर के शहीद पार्क स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने दिए गए सांकेतिक धरने को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि आपातकाल इस देश पर एक काला धब्बा है।
उन्होंने कहा कि वह एक दौर था जब लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष किया गया, लेकिन आज देश की स्थिति उस दौर से भी बदतर हो गई है और सच बोलने की सजा जेल हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र और मानवीय अधिकारों का अतिक्रमण कर लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है तथा सरकारी एजेंसियों के दम पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में लोकतंत्र सेनानी होने के नाते सभी लोगों का यह कर्तव्य है कि एक बार फिर इस अघोषित आपातकाल के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं।
गौरतलब है कि 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की गई थी और उस समय केंद्र में इंदिरा गांधी के नेतृत्व की कांग्रेस सरकार थी।
आपातकाल को 21 मार्च 1977 को हटा लिया गया था।
आनन्द सलीम
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