वाशिंगटन स्थित रूसी दूतावास ने सोमवार को ट्वीट किया था कि उसके सैन्य बलों ने यूक्रेन को प्रदान किए गए सबसे उन्नत और शक्तिशाली हथियारों में से एक जर्मन निर्मित आठ लेपर्ड टैंक को ‘‘नष्ट’’ कर दिया है।
इसके बाद रूसी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को सोशल मीडिया नेटवर्क ‘टेलीग्राम’ पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें लिखा था कि इसमें ‘लेपर्ड टैंक सहित विदेशी बख्तरबंद वाहनों को नष्ट किए जाने का फुटेज’’ दिखाया गया है।
वीडियो को रूस सरकार नियंत्रित प्रसारकों और समाचार साइट द्वारा बड़े पैमाने पर दिखाया गया, जिसमें कहा गया था कि इस वीडियो को केए-52 एलीगेटर अटैक हेलीकॉप्टर के थर्मल इमेजिंग सिस्टम से रिकॉर्ड किया गया।
जर्मनी ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि वह यूक्रेन को 18 लेपर्ड-दो टैंक मुहैया कराएगा। यह नाटो देशों द्वारा यूक्रेन को प्रदान किए जाने वाले हथियारों में शामिल है।
यूक्रेन के अधिकारियों ने इस सप्ताह इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था कि क्या युद्ध में लेपर्ड टैंक का इस्तेमाल किया जा रहा है। रूस द्वारा वीडियो ऑनलाइन साझा किए जाने के बाद कई हथियार विशेषज्ञों और सैन्य ब्लॉगर ने संदेह जताया कि हेलीकॉप्टर की मिसाइल से क्या टैंक को निशाना बनाया जा सकता है।
एपी द्वारा वीडियो के विश्लेषण में एक खेत में खड़ी कृषि मशीनरी या ट्रैक्टर के बड़े टुकड़े प्रतीत होते हैं। विशेष रूप से स्व-चालित स्प्रेयर और दो कंबाइन प्रतीत होते हैं, जिसका इस्तेमाल मकई और गेहूं की कटाई के लिए होता है। रूसी मिसाइल द्वारा निशाना बनाए गए वाहन में चार बड़े पहिए हैं और यह जमीन से काफी ऊंचा दिखता है। लेपर्ड-दो टैंक नीचे झुके होते हैं और बुलडोजर की तरह चलते हैं।
रूसी दूतावास ने इस सप्ताह यह भी दावा किया कि उसकी सेना ने फ्रांस निर्मित तीन एएमएक्स-10 हल्के टैंक को नष्ट कर दिया है। हालांकि, एएमएक्स-10 में चार नहीं, बल्कि छह पहिये होते हैं।
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