देश की खबरें | हिजाब पर हंगामा लोगों का ‘शोषण’ करने के लिए, ‘अजान’ विवाद कोई मुद्दा नहीं : केरल के राज्यपाल

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को हिजाब विवाद को लोगों का “शोषण” करने का प्रयास करार दिया और ऐसी बाधाओं को दूर करने के लिए लोगों को शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

यहां एनडीएमसी सभागार में आयोजित ‘लोक संसद’ कार्यक्रम से इतर मीडिया से बात करते हुए खान ने कर्नाटक में चल रहे ‘अजान’ विवाद के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह ‘कोई मुद्दा नहीं’ है।

कुछ दक्षिणपंथी संगठनों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने मस्जिदों से लाउड स्पीकरों के इस्तेमाल को रोकने का आह्वान करते हुए कहा है कि वे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं।

कर्नाटक में कुछ लोगों द्वारा अजान का विरोध किए जाने के बारे में पूछने पर खान ने कहा, “क्या यह एक मुद्दा है? इसके बारे में बात करने से उन्हें मदद मिल रही है। क्या आप उनकी मदद करना चाहते हैं।”

केरल के राज्यपाल ने कहा कि अगर उचित शिक्षा दी जाए तो लोग अपना ख्याल रख सकते हैं।

उन्होंने कहा, “ये सभी प्रयास लोगों का शोषण करने के लिए हैं। अगर आप लोगों को ठीक से शिक्षित करेंगे, तो वे अपना ख्याल रखेंगे।”

खान ने कहा कि बाधाएं आती रहती हैं लेकिन भारत का आगे बढ़ना तय है।

‘लोक संसद’ में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, खान ने पहले कहा था कि भारत में एक बार फिर विश्व गुरु बनने की क्षमता है।

उन्होंने कहा, “भारत में एक बार फिर विश्व गुरु बनने की क्षमता है और इसके लिए हमारी ज्ञान परंपरा को छिपाने की प्रवृत्ति को त्यागने की जरूरत है। उपनिषद ज्ञान प्राप्त करने और इसे दूसरों के साथ साझा करने का आह्वान करते हैं।”

खान ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि देश में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

कार्यक्रम में लोक संसद के संरक्षक केएन गोविंदाचार्य, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राष्ट्रीय इमाम संघ के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी, मौलाना कल्बे रुशैद, राजेंद्र सिंह, समाजवादी रघु ठाकुर सहित अन्य लोग शामिल हुए।

सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा लोगों की प्राथमिकता बन गई है लेकिन यह अभी तक राष्ट्रीय, प्रशासनिक, राजनीतिक प्राथमिकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश में शिक्षण संस्थानों द्वारा प्रदान की जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की एक निचली रेखा खींचने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “भारत एक विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र की ओर तब तक नहीं बढ़ सकता जब तक कि बच्चों को शिक्षा की गुणवत्ता प्रदान करने का एक मानक न हो।”

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