जरुरी जानकारी | किफायती आवास खंड में 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश की गुंजाइशः रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 22 नवंबर संपत्ति सलाहकार फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया का कहना है कि शहरी इलाकों में करीब 3.5 करोड़ गुणवत्तापूर्ण आवासों की जरूरत है लिहाजा किफायती या सस्ते मकानों के खंड में करीब 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं हैं।

नाइट फ्रैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि दुनिया की 7.9 अरब आबादी में से करीब 4.5 अरब लोग शहरी इलाकों में रहते हैं। वहीं भारत में शहरी आबादी का 35 प्रतिशत हिस्सा निम्न-गुणवत्ता वाले घरों में रहता है। इस तरह भारत में गुणवत्तापूर्ण घरों की जरूरत करीब 3.5 करोड़ है।

इनमें से करीब दो करोड़ आवास आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए चाहिए जबकि निम्न आय-वर्ग के लिए 1.4 करोड़ और निम्न मध्य वर्ग के लिए एक करोड़ घरों की जरूरत होगी।

नाइट फ्रैंक का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर घर बनाने के लिए 1,658 करोड़ वर्ग फुट जमीन की जरूरत होगी। इन घरों के निर्माण पर करीब 34.56 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी जबकि जमीन अधिग्रहण एवं अन्य जरूरतों के लिए 10.36 लाख करोड़ रुपये चाहिए।

इस तरह भारत में सभी जरूरतमंदों को आवास मुहैया कराने के लिए करीब 45 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की जरूरत पड़ेगी। उसने इसे निजी कोषों के लिए निवेश का एक बढ़िया मौका भी बताया है।

नाइट फ्रैंक में वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया ने कहा कि वर्ष 2011 से ही भारत के किफायती आवास क्षेत्र में 259.7 करोड़ डॉलर का निजी इक्विटी निवेश आ चुका है।

प्रॉपर्टी सलाहकार फर्म का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत की 40 प्रतिशत से भी अधिक आबादी शहरी इलाकों में रह रही होगी जबकि मौजूदा समय में यह अनुपात 35 प्रतिशत का है।

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