जरुरी जानकारी | जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिये राज्यों को जारी होंगे 20,000 करोड़ रुपये, 2022 के बाद भी लगेंगा उपकर

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर केंद्र ने सोमवार को कहा कि वह जीएसटी क्षतिपूर्ति केबकाया के मद में आज रात राज्यों को 20,000 करोड़ रुपये जारी करेगा।

जीएसटी परिषद की 42वीं बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिन राज्यों को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी)के हिस्से में 2017-18 के लिये कम प्राप्त हुआ , केंद्र उनके लिये अगले सप्ताह संचयी रूप से 24,000 करोड़ रुपये जारी करेगा।

यह भी पढ़े | Hathras Gangrape Case: हाथरस दुष्कर्म मामले के आरोपियों पर इनाम की घोषणा करने वाले कांग्रेसी नेता निजाम मलिक हुए गिरफ्तार, मामला दर्ज.

राज्यों को क्षतिपूर्ति जारी करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘‘इस साल हमने अब तक जो भी संग्रह किया है, 20,000 करोड़ रुपये का वितरण आज रात राज्यों को किया जाएगा।’’

राज्यों को अप्रैल-जुलाई के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की जरूरत है।

यह भी पढ़े | Gandhi Jayanti 2020: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा- महात्मा गांधी की विचारधारा से प्रभावित मोदी सरकार.

आईजीएसटी के मु्द्दे पर सीतारमण ने कहा कि कुछ राज्यों को अधिक आईजीएसटी का वितरण हुआ है, उसे वापस लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह राशि कितनी है।

सीतारमण ने कहा कि अगले सप्ताह के मध्य में उन राज्यों को 24,000 करोड़ रुपये जारी किया जाएगा, जिन्हें आईजीएसटअी के हिस्से में वास्तविक बकाया के मुकाबले कम प्राप्त हुआ है।

मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने जून 2022 के बाद भी जीएसटी उपकर जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। पहले जीएसटी उपकर लगाये जाने की समयसीमा जून 2022 थी।

उन्होंने कहा, ‘‘क्षतिपूर्ति उपकर पांच साल के बाद भी यानी जून 2022 के बाद भी लगाये जाने का निर्णय किया गया है। यह उतनी अवधि के लिये लगाया जाएगा, जो राजस्व अंतर को पूरा करने के लिये जरूरी होगा।’’

जीएसटी ढांचे के तहत कर 5, 12, 18, और 28 प्रतिशत के स्लैब में लगाये जाते हैं। उच्च दर से कर के अलावा आरामदायक तथा समाज के नजरिये से अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता है। उपकर से प्राप्त राशि का उपयोग राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई के लिये किया जाता है।

वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि एक जनवरी, 2021 से जीएसटी रिफंड पंजीकृत करदाता के पैन और आधार से जुड़े स्वीकृत बैंक खाते में ही किया जाएगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)