नयी दिल्ली, 19 जून केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रोशनी भूमि आवंटन में कथित घोटाले के सिलसिले में रविवार को श्रीनगर में व्यवसायी शौकत चौधरी के परिसरों में छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में चौधरी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किये जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने 15 जून को चौधरी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों महबूब इकबाल (कश्मीर के तत्कालीन संभागीय आयुक्त) और शेख एजाज इकबाल (श्रीनगर के तत्कालीन उपायुक्त) के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया था।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने प्राथमिकी में अन्य सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी नामजद किया है, जिनमें कश्मीर प्रशासनिक सेवा से मोहम्मद अफजल भट; कश्मीर के तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त मुश्ताक अहमद मलिक (सहायक आयुक्त, राजस्व, श्रीनगर); नजूल के तत्कालीन तहसीलदार मोहम्मद अकरम खान और श्रीनगर के तत्कालीन तहसीलदार शेख मुनीर अख्तर शामिल हैं।
जाकुरा के चौधरी बाग में हैट्रिक फूड इंडस्ट्रीज के मालिक चौधरी जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसने इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चौधरी को रोशनी अधिनियम के तहत एक भूखंड का अनधिकृत कब्जाधारी घोषित किया गया था और अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए उन्हें 14.40 लाख रुपये में आठ मरला भूमि का स्वामित्व दिया गया था।
इस तरह का आरोप है कि श्रीनगर के एस्टेट नर्सिंग गढ़ में चार कनाल की जमीन को जम्मू-कश्मीर सरकार ने 1977 में महबूब बेग और मुमताज अफजल बेग को पट्टे पर दिया था और पट्टा समझौता 2020 में खत्म हो रहा था। लेकिन उन्होंने 2001 में ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के आधार पर चौधरी को कुल चार कनाल भूमि में से आठ मरला सौंप दी थी।
प्राथमिकी के अनुसार, ‘‘पावर ऑफ अटॉर्नी धारक चौधरी ने बाद में 24 फरवरी, 2004 के आवेदन के माध्यम से रोशनी अधिनियम के तहत स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए आवेदन किया।’’
श्रीनगर के तत्कालीन उपायुक्त ने आठ अक्टूबर, 2004 को संभागीय आयुक्त को संबोधित एक पत्र में उल्लेख किया था कि इस मामले पर स्वामित्व के अधिकार के लिए विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि विचाराधीन भूमि एक महत्वपूर्ण सड़क के केंद्र से 50 फुट के दायरे के भीतर थी।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि चौधरी को रोशनी अधिनियम के तहत अनधिकृत रूप से कब्जा धारक माना जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि मूल पट्टा महबूब बेग और मुमताज अफजल बेग के नाम पर था।
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