देश की खबरें | उप्र के प्रमुख सचिव अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा करें: एनजीटी

नयी दिल्ली, 23 अप्रैल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को खतरनाक पदार्थों से जुड़ी अवैध वाणिज्यिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए राज्य की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा करने और उसे अद्यतन करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले के गुन्नौर कस्बे में एक अवैध पटाखा गोदाम में भीषण आग लगने और विस्फोट जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने 22 अप्रैल के अपने आदेश में कहा, “उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को खतरनाक पदार्थों से जुड़ी अवैध वाणिज्यिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए राज्य में मौजूद तंत्र की समीक्षा करने और उसे अद्यतन करने तथा सभी संबंधित हितधारकों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया जाता है।”

पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी तथा विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद भी शामिल थे।

उसने मुख्य सचिव को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए “उचित उपचारात्मक उपायों” पर आवश्यक विचार-विमर्श के बाद निर्देश जारी करने और समय-समय पर पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन एवं प्रणाली की निगरानी का निर्देश दिया।

एनजीटी ने कहा कि राज्य और उसके तंत्र पीड़ितों की मौत की सूरत में 20 लाख रुपये का मुआवजा देने के लिए “कानूनी रूप से बाध्य” हैं।

उसने कहा, “संभल के जिलाधिकारी ने दलील दी है कि जिला प्रशासन के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है, लेकिन इससे मृतकों के कानूनी उत्तराधिकारियों/आश्रितों, घायलों और आसपास के क्षतिग्रस्त मकानों के मालिकों को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता।”

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