नयी दिल्ली, छह जून लॉकडाउन के दौरान भोजनालय खोले जाने की सरकार से अनुमति मिलने के बाद कई रेस्तरां कारोबारियों ने कहा है कि ग्राहकों की संख्या की सीमा तय किये जाने से उनका व्यवसाय घाटे का सौदा हो जाएगा और इन्हें बंद रखना ही बेहतर होगा।
रेस्तरां मालिकों ने संकेत दिया कि बाहर जाकर भोजन करना अब भी दूर की बात है और घर पर भोजन पहुंचाना जारी रहेगा।
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उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का कोई मतलब नहीं है क्योंकि नकदी संकट से जूझ रहा उद्योग विस्तारित लॉकडाउन से सावधानी पूर्वक बाहर निकल रहा है और अपने भविष्य की योजना बना रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कुछ एसओपी जारी की थी, इनके जरिये अगले हफ्ते रेस्तरां में बैठ कर भोजन करने वाले व्यक्तियों की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत की गई है। ये रेस्तरां गृह मंत्रालय के एक पूर्व के आदेश के मुताबिक है।
सामाजिक दूरी के नियमों का जिक्र करते हुए एसओपी में रेस्तरां के अंदर और कतार में कम से कम छह फुट की दूरी रखे जाने का दिशानिर्देश दिया गया है।
ज्यादातर पाबंदियों की जरूरत को स्वीकार करते हुए उद्योग के अंदर के लोगों ने कहा कि रेस्तरां में बैठ कर भोजन करने वाले लोगों की संख्या आधा करना व्यवहारिक नहीं है।
दिल्ली, मुंबई स्थित प्लम बाई बेंट चेयर, लॉर्ड ऑफ द ड्रिंक्स और तमाशा जैसे रेस्तरां श्रृंखला के मालिक प्रियंक सुखीजा ने कहा कि एसओपी विस्तारित लॉकडाउन से कहीं अधिक नुकसानदेह है।
सुखीजा ने पीटीआई- से कहा, ‘‘बैठने की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ करीब 80 प्रतिशत रेस्तरां बाद में खुलने के बाद भी भवन किराया, कर्मचारियों के वेतन और बिजली बिल के कारण घाटे का सौदा हो जाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके रेस्तरां बंद रहेंगे।
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