देश की खबरें | रेस्तरां में ग्राहकों की संख्या की सीमा तय किये जाने से करोबार घाटे का सौदा हो जाएगा:रेस्तरां मालिक
जियो

नयी दिल्ली, छह जून लॉकडाउन के दौरान भोजनालय खोले जाने की सरकार से अनुमति मिलने के बाद कई रेस्तरां कारोबारियों ने कहा है कि ग्राहकों की संख्या की सीमा तय किये जाने से उनका व्यवसाय घाटे का सौदा हो जाएगा और इन्हें बंद रखना ही बेहतर होगा।

रेस्तरां मालिकों ने संकेत दिया कि बाहर जाकर भोजन करना अब भी दूर की बात है और घर पर भोजन पहुंचाना जारी रहेगा।

यह भी पढ़े | पंजाब में कोरोना के 54 नए मरीज पाए गए: 6 जून 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का कोई मतलब नहीं है क्योंकि नकदी संकट से जूझ रहा उद्योग विस्तारित लॉकडाउन से सावधानी पूर्वक बाहर निकल रहा है और अपने भविष्य की योजना बना रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कुछ एसओपी जारी की थी, इनके जरिये अगले हफ्ते रेस्तरां में बैठ कर भोजन करने वाले व्यक्तियों की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत की गई है। ये रेस्तरां गृह मंत्रालय के एक पूर्व के आदेश के मुताबिक है।

यह भी पढ़े | बीजेपी सांसद मिनाक्षी लेखी का कांग्रेस पर हमला, बोली- गोमूत्र और गोबर का योगदान इस देश की अर्थव्यवस्था में वो 60 साल की कांग्रेस गवर्नेंस से ज्यादा.

सामाजिक दूरी के नियमों का जिक्र करते हुए एसओपी में रेस्तरां के अंदर और कतार में कम से कम छह फुट की दूरी रखे जाने का दिशानिर्देश दिया गया है।

ज्यादातर पाबंदियों की जरूरत को स्वीकार करते हुए उद्योग के अंदर के लोगों ने कहा कि रेस्तरां में बैठ कर भोजन करने वाले लोगों की संख्या आधा करना व्यवहारिक नहीं है।

दिल्ली, मुंबई स्थित प्लम बाई बेंट चेयर, लॉर्ड ऑफ द ड्रिंक्स और तमाशा जैसे रेस्तरां श्रृंखला के मालिक प्रियंक सुखीजा ने कहा कि एसओपी विस्तारित लॉकडाउन से कहीं अधिक नुकसानदेह है।

सुखीजा ने पीटीआई- से कहा, ‘‘बैठने की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ करीब 80 प्रतिशत रेस्तरां बाद में खुलने के बाद भी भवन किराया, कर्मचारियों के वेतन और बिजली बिल के कारण घाटे का सौदा हो जाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके रेस्तरां बंद रहेंगे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)