देश की खबरें | सिविल सेवा परीक्षा में दिव्यांगों के लिये आरक्षण: पीआईएल पर अदालत ने केंद्र, यूपीएससी से मांगा जवाब
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 10 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को अखिल भारतीय सिविल सेवाओं में रिक्तियों की गणना की पद्धति के बारे में ब्योरा देने को कहा। इन रिक्तियों के लिये आयोग भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायूर्ति प्रतीक जलान की पीठ ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यूपीएससी से इस संबंध में जवाब मांगा है।

यह भी पढ़े | Rajasthan Political Crisis: जल्द होगी सचिन पायलट की घर वापसी? राहुल-प्रियंका से हुई मुलाकात.

याचिका में सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के विवरण की घोषणा करने वाली इस साल के नोटिस को चुनौती दी गई है। कोविड-19 महामारी के कारण के इस साल यह परीक्षा चार अक्टूबर को होने का कार्यक्रम है।

यह चुनौती इस आधार पर दी गई है कि नोटिस में दिव्यांग जनों को उपलब्ध कराये जाने वाले न्यूनतम आरक्षण की अनदेखी की गई है।

यह भी पढ़े | फिल्म अभिनेता संजय दत्त को मुंबई के लीलावती अस्पताल से मिली छुट्टी: 10 अगस्त 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

उच्च न्यायालय ने केंद्र, यूपीएससी और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस)जैसी विभन्न सेवाओं से संबद्ध मंत्रालयों को नोटिस जारी किये हैं। परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की भर्ती इन सेवाओं में की जाती है।

अदालत ने अपने नोटिस के जरिये गैर सरकारी संगठन संभावना की याचिका पर उनसे अपना रुख बताने को कहा है।

दरअसल, एनजीओ ने आरोप लगाया है कि परीक्षा के नोटिस के तहत दिव्यांगों के लिये सिर्फ संभावित लगभग रिक्तियों का उल्लेख किया गया है और कानून के मुताबिक अनिवार्य चार प्रतिशत आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया है।

अधिवक्ता कृष्ण महाजन और अजय चोपड़ा के माध्यम दायर याचिका में दलील दी गई है कि दिव्यांग जनों के अधिकार अधिनियम 2016 यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक सरकारी प्रतिष्ठान अपनी कुल रिक्तियों का चार प्रतिशत दिव्यांगों के लिये आरक्षित करेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)