देश की खबरें | आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने मांग के अनुरूप सिग्नल नियंत्रण की व्यवस्था बनाई

नयी दिल्ली, 23 मई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने यातायात सिग्नलों की वास्तविक समय में “री-टाइमिंग” के लिए जांच-आधारित दृष्टिकोण के उपयोग के माध्यम से भारतीय सड़कों पर ट्रैफिक जाम का एक संभावित समाधान निकाला है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह संभवत: पहली बार है जब भारतीय परिस्थितियों के लिए जांच-आधारित, मांग के अनुरूप सिग्नल नियंत्रण विकसित किया गया है।

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसमें प्रत्येक सिग्नल चक्र के लिए “हरे” और “लाल” समय की गणना करने के लिए चार नमूना-जांच वाहनों से यात्रा-समय के आंकड़ों का उपयोग किया गया था।

सिग्नल चक्र दरअसल एक सिग्नल पर एक हरी बत्ती से अगली अगली हरी बत्ती होने या एक लाल बत्ती से अगली लाल बत्ती होने के बीच का समय होता है।

आईआईटी मद्रास में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की चेयर प्रोफेसर ललिता वनाजाक्क्षी ने कहा, “ विदेश से आयातित सिग्नलिंग सॉफ्टवेयर के प्रयोग पर काफी समय, प्रयास और पैसा खर्च किया गया, लेकिन ये भारतीय यातायात स्थितियों में अच्छी तरह से काम नहीं कर पाए हैं, क्योंकि उनके कार्यान्वयन के लिए कई सेंसर और बड़े यातायात प्रवाह आंकड़े की आवश्यकता होती है, जिसे एकत्र करना आसान नहीं था।”

उन्होंने कहा, “इसके अलावा, ये सॉफ्टवेयर अपने एल्गोरिद्म में भारतीय यातायात विशेषताओं को शामिल करने के लिए शायद ही कभी लचीले थे, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पूंजी निवेश के बावजूद चौराहे पर अत्यधिक कतारें लगती हैं और देरी होती है।”

ये निष्कर्ष ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च’ में प्रकाशित किए गए हैं।

अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने यातायात प्रवाह के पारंपरिक आंकड़े के बजाय वाहन वर्ग के लिये अपरिवर्तनीय यात्रा-समय के आंकड़े का उपयोग किया है। यह विभिन्न प्रकार के जांच-आधारित आंकड़ा स्रोतों जैसे ब्लूटूथ, वाई-फाई और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन स्कैनर के साथ एल्गोरिद्म को लागू करना आसान बनाता है।

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