सरकार ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और उनकी कंजर्वेटिव पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए रिपोर्ट को जारी करने में छह महीने से अधिक का विलंब कर दिया।
सांसदों की एक प्रभावशाली समिति अपनी पड़ताल रिपोर्ट संसद को सौंपने की योजना बना रही है। यह रिपोर्ट जॉनसन को 17 अक्टूबर को सौंप दी गई थी।
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सरकार ने पहले कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर समीक्षा होने तक रिपोर्ट का प्रकाशन नहीं किया जा सकता। इसने 12 दिसंबर को हुए आम चुनाव के बाद तक के लिए रिपोर्ट का प्रकाशन स्थगित कर दिया। इसके बाद खुफिया एवं सुरक्षा समिति में नए सदस्यों की नियुक्ति में देरी कर रिपोर्ट को जारी करने में और विलंब किया गया।
जॉनसन ने अंतत: इस उम्मीद में नौ सदस्यीय समिति में पांच कंजर्वेटिव सांसदों की नियुक्ति कर दी कि उनकी पसंद का व्यक्ति समिति का अध्यक्ष बनेगा और रिपोर्ट को जारी होने से रोक देगा।
प्रधानमंत्री की इस उम्मीद पर तब पानी फिर गया जब पार्टी निरपेक्ष ऐसा कंजर्वेटिव सांसद इसका अध्यक्ष बन गया जिसे विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था।
विपक्षी लेबर पार्टी की प्रवक्ता लिसा नंदी ने कहा, ‘‘रूस से संबंधित रिपोर्ट में क्या है, जॉनसन उसे दिन के उजाले में नहीं देखना चाहते।’’
लेबर पार्टी का आरोप है कि सरकार ने रिपोर्ट का प्रकाशन इसलिए नहीं किया क्योंकि इससे यूरोपीय संघ की सदस्यता के मुद्दे पर 2016 में हुए जनमत संग्रह के दौरान रूस तथा ब्रेग्जिट समर्थक अभियान के बीच संबंधों को लेकर और सवाल उठेंगे जिसमें जॉनसन ने मदद की।
खुफिया समिति की रिपोर्ट में ब्रिटेन को रूस से खतरे, चुनाव में हस्तक्षेप, जासूसी और लक्षित हत्याओं जैसे सभी विषय शामिल हैं।
एपी
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