देश की खबरें | धार्मिक असहिष्णुता, दंगों और बॉलीवुड ने 2022 में रखा दिल्ली की अदालतों को व्यस्त

नयी दिल्ली, 29 दिसंबर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सत्येन्द्र जैन, एनएसई की पूर्व प्रमुख चित्रा रामकृष्ण और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडेय से जुड़े मामले 2022 में दिल्ली की अदालतों में अहम रहे।

तथ्य-जांच करने वाली वेबसाइट ‘अल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की हिरासत, आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने के मामले में अलगाववादी नेता यासिन मलिक का कबूलनामा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ आतंकवाद का मामला और बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलिन फर्नान्डिज के खिलाफ धन शोधन का मुकदमा, ये कुछ अन्य ऐसे मामले हैं जो 2022 में अदालतों की सुर्खियों में रहे।

इस दौरान कोविड महामारी के प्रकोप में कमी आने के बाद अदालतों ने पुराने तरीके से अदालती कक्ष में मुकदमों की सुनवाई भी शुरू कर दी।

तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिले के बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल सहित पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ भारत-बांग्लादेश सीमा पर मवेशियों की तस्करी के आरोप भी खबरों में रहे।

दिल्ली की एक अदालत ने धन शोधन के मामले में जेल में बंद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की कई अर्जियों को ठुकराया। इनमें जमानत की अर्जी के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन उपलब्ध कराने के अनुरोध अर्जी भी शामिल थी।

अदालत ने नियमों का उल्लंघन करके जेल में विभिन्न विशेष सुविधाएं दिए जाने को लेकर जैन को फटकार लगायी, हालांकि बाद में मंत्री को ये सुविधाएं मिलनी बंद हो गईं।

यह पूरा विवाद जैन को जेल में विशेष सुविधाएं दिए जाने से जुड़ा एक वीडियो आने के बाद शुरू हुआ। इसके बाद जैन ने जेल में उनकी कोठरी का वीडियो लीक करने को लेकर तिहाड़ जेल के अधिकारियों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने और मीडिया द्वारा इस क्लिप का प्रसारण बंद करने का अनुरोध करते हुए आवेदन भी दिया था। हालांकि, बाद में जैन ने यह आवेदन वापस ले लिया।

हिन्दू देवी के खिलाफ 2018 में ‘आपत्तिजनक ट्वीट’ से जुड़े मामले में मोहम्मद जुबैर को 27 जून को गिरफ्तार किया गया, लेकिन 15 जुलाई को जमानत देते हुए अदालत ने कहा, ‘‘स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विरोध की आवाज होना जरूरी है’’ और हिन्दू धर्म तथा उसे मानने वाले ‘‘सहिष्णु’’ हैं।

अदालतों ने आतंकवाद से जुड़े मुकदमों की भी सुनवाई की जिसमें अब प्रतिबंधित समूह पीएफआई भी शामिल है। अदालत ने ऐसे ही एक और मामले की सुनवाई की जिसमें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने अपने ही पूर्व पुलिस अधीक्षक अरविन्द दिग्विजय नेगी को गिरफ्तार किया था।

कश्मीरी अलगाववादी नेता मोहम्मद यासिन मलिक को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने का दोषी करार देते हुए जेल की सजा सुनाई गई।

वहीं, दिसंबर में एक अन्य अदालत ने फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और ‘यूनाइटेड एगेंस्ट हेट’ के संस्थापक खालिद सैफी को आरोपमुक्त कर दिया। सैफी को एक अन्य मामले में जहां सामान्य जमानत मिली, खालिद को अपनी बहन की निकाह में शामिल होने के लिए महज सात दिनों की अंतरिम जमानत मिली।

वहीं, दिसंबर, 2019 में दंगे भड़काने के आरोपी व जेएनयू के पूर्व छात्र शर्जिल इमाम को राजद्रोह के एक मामले में जमानत मिल गई। हालांकि, दिल्ली दंगों से जुड़े मामले को लेकर वह अभी भी जेल में बंद है।

शहर की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों से जुड़े मामलों में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित विभिन्न के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए।

अप्रैल में हनुमान जयंती के जुलूस के दौरान जहांगीरपुरी में हुए दंगों से जुड़ा मामला भी सुर्खियों में रहा। इसमें एक पुलिस उपनिरीक्षक को गोली लग गई थी। घटना के सिलसिले में दायर आरोपपत्र में 45 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश एवं अन्य आरोप लगाए गए हैं।

जुबैर के खिलाफ मुकदमों के अलावा अदालतों ने धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़े तमाम अन्य मुकदमों पर भी सुनवाई की। इसमें वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद से ‘शिवलिंग’ मिलने के दावों पर मई में सोशल मीडिया पर ‘‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ करने को लेकर दिल्ली विश्वविद्याय के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल की गिरफ्तारी भी शामिल है। अदालत ने कहा कि उनकी टिप्पणी निंदक है लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि उसका लक्ष्य समुदायों के बीच कटुता बढ़ाना है।

एक अन्य मामले में दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से कहा कि वह अगले आदेश तक कुतुब मीनार परिसर में लगी भगवान गणेश की दो प्रतिमाओं को ना हटवाए।

अदालत ने विवादित ‘बुल्ली बाई ऐप’ के आरोपी की हिरासत मामले पर भी सुनवाई की।

धार्मिक असहिष्णुता से जुड़े एक अन्य मामले में फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई को अदालत के समक्ष पेश होना पड़ा क्योंकि अदालत से अनुरोध किया गया था कि वह निर्माता को उनकी फिल्म ‘काली’ में देवी काली को ‘आपत्तिजनक स्वरूप’ में प्रस्तुत करने से रोके। अदालत इस मामले की सुनवाई जनवरी में जारी रखेगी।

वहीं, कथित ठग सुकेश चन्द्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ रुपये की कथित जबरन वसूली के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी ‘लुक आउट सर्कुलर (एलओसी)’ को निलंबित करने और उन्हें विदेश यात्रा पर जाने की अनुमति देने का अनुरोध करते हुए अभिनेत्री जैक्लीन फर्नान्डिज अदालत पहुंचीं।

ईडी ने अगस्त में दाखिल अपने पूरक आरोपपत्र में अभिनेत्री को नामजद किया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें समन किया और फिर जमानत दे दी।

बॉलीवुड के एक अन्य अभिनेत्री नोरा फतेही ने इस मामले में उनका नाम घसीट कर कथित रूप से उन्हें बदनाम करने के लिए जैकलीन और कई मीडिया हाउसों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा किया। मामले में सुनवाई जनवरी में होगी।

रद्द कर दी गई दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले का मामला भी अदालत पहुंचा। आरोपपत्र में ईडी ने आरोप लगाया कि आबकारी नीति से 2,873 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई है और आप के नेताओं ने यह नीति अवैध रूप से धन जमा करने के लिए बनायी थी।

ईडी ने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत के कुछ प्रतिष्ठित लोगों जैसे... तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव की पुत्री के. कविता, ओंगोले (आंध्र प्रदेश) से सांसद मंगुंटा श्रीनिवाससुलु रेड्डी, उनके पुत्र राघव मंगुंटा और अन्य ने शराब के धंधे में अपने फायदे के बदले आप नेताओं को करीब 100 करोड़ रुपये दिए।

अदालत ने कथित आबकारी घोटाला मामले में आप के संचार प्रभारी विजय नैयर और अन्य की गिरफ्तारी तथा हिरासत मामले की भी सुनवाई की। अदालत ने मामले में आरोपी व मनीष सिसोदिया के तथाकथित करीबी सहयोगी उद्यमी दिनेश अरोड़ा को सरकारी गवाह बनने की अनुमति भी दी।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर मवेशियों की कथित तस्करी से जुड़े मामलों ने भी राष्ट्रीय राजधानी की अदालतों को व्यस्त रखा।

पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या, पश्चिम बंगाल में कथित कोयला घोटाला, 1997 का उपहार सिनेमा अग्निकांड और ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार के खिलाफ मुकदमे भी सुर्खियों में रहे।

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