देश की खबरें | श्रम कानूनों में ढील से बाल मजदूरी बढ़ेगी : गैर सरकारी संगठन
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नयी दिल्ली, 12 जून गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के गठबंधन ने लॉकडाउन के बाद श्रम कानूनों में ढील देने से महिला श्रमिकों पर दुष्प्रभाव पड़ने और श्रमबल में बाल मजदूरों की शामिल होने की आशंका जताई है और सरकार से विधेयक की समीक्षा करने की अपील की है।

गठबंधन - वर्किंग ग्रुप ऑन वुमेन इन वैल्यू चैन्स (डब्ल्यूआईवीसी)- ने रेखांकित किया है कि कैसे आर्थिक विकास की गति बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तर पर दी गई ढील से श्रम कानून कमजोर पड़ सकता है।

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डब्ल्यूआईवीसी में ‘सेव द चिल्ड्रेन’, सेवा भारत, केयर इंडिया, इंटरनेशनल डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर, सोसाइटी फॉर लेबर एंड डेवलपमेंट, ऑक्सफाम इंडिया, चेंज अलायंस आदि शामिल हैं।

गठबंधन ने एक बयान में कहा कि काम करने के घंटे को नौ से 10 या 12 करने, कामगारों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जैसे श्रमिक कल्याण नियमों को शिथिल करने, कुछ स्थानों पर उद्योगों के निरीक्षण करने की प्रणाली स्थगित करने जैसे उपायों से महिला श्रमिकों पर नकरात्मक असर होगा और बच्चे प्रभावित होंगे।’’

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गठबंधन ने कहा, ‘‘निगरानी प्रणाली की व्यवस्था में ढील देने से उत्पीड़न की घटनाओं में बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार बढ़ेगा। इससे बच्चे श्रमबल में शामिल होंगे।’’

बयान के मुताबिक प्रवासी श्रमिक शहरी अर्थव्यवस्था के प्रमुख संचालक है लेकिन लॉकडाउन की वजह से वे अपने गांवों को जाने को मजबूर हुए क्योंकि रोजगार और आय की असुरक्षा से उनपर शोषण और गरीबी का खतरा बढ़ गया था।

गठबंधन ने कहा, ‘‘काम के घंटे बढ़ाने से अभिभावकों द्वारा बच्चों की देखरेख पर भी असर पड़ेगा क्योंकि वे उनकी देखभाल और शिक्षा पर कम समय दे पाएंगे। श्रमिकों की कल्याणकारी योजनाओं के कम होने का भी नकारात्मक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ेगा।’’

डब्ल्यूआईवीसी ने सरकार से अपील की कि वह श्रम कानून के प्रासंगिक प्रावधानों को कायम रखे और संगठित एवं गैर संगठित क्षेत्र के कामगारों की बेहतरी सुनिश्चित करे। वह यह सुनिश्चित करे कि राज्य और उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यताप्राप्त श्रम मानकों का अनुपालन करें और कामगारों की सुरक्षा और संरक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क में रहे।

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