नयी दिल्ली, 27 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार से सोमवार को कहा कि उसके राजस्व में कमी को नगर निगम कर्मियों को वेतन का भुगतान करने के लिए निगमों के पास निधि नहीं होने का कारण नहीं बताया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि इसका समाधान खोजना होगा। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख तय की।
पीठ ने दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (आपराधिक) राहुल मेहरा से आगामी तिथि पर निर्देशों के साथ आने को कहा।
मेहरा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान अदालत से कहा कि सरकार का राजस्व कम हो रहा है, लेकिन यथोचित कदम उठाए जाएंगे।
पीठ ने कहा, ‘‘यह (राजस्व की कमी) उत्तर नहीं दिया जा सकता। समाधान खोजना होगा। समाधान खोजिए और हमें बताइए।’’
उत्तर दिल्ली नगर निगम ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि 30 जून को समाप्त हुई पहली तिमाही में स्वच्छता/शहरी विकास मद के लिए मंजूर की गई 90.60 करोड़ रुपए की राशि अभी जारी नहीं की गई है और इसी मद के तहत दूसरी तिमाही में भी 181 करोड़ रुपए अभी बकाया हैं।
निगम ने याचिका में कहा है कि इस निधि का इस्तेमाल ‘‘सफाई कर्मचारियों’ के वेतन के भुगतान और स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए किया जाना है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY