नयी दिल्ली, 23 अप्रैल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने मक्का की आठ नई संकर किस्मों को मान्यता दी है। देश में विभिन्न मौसमों और कृषि-पारिस्थितिकी में इनकी खेती की जा सकती है।
अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) की एक डिजिटल कार्यशाला के माध्यम से कृषि वैज्ञानिकों के साथ चर्चा के बाद इन मक्का किस्मों को मान्यता दी गयी है। इस परियोजना में देश भर के 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए, आईसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने कोविड-19 महामारी के संकट के बीच अनुसंधान कार्य जारी रखने के लिए मक्का वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने लुधियाना स्थित आईसीएआर-भारतीय मक्का शोध संस्थान (आईसीएआर-आईआईएमआर) को मक्के के उत्पादन, उत्पादकता को बढ़ाने और इस पर बुनियादी, रणनीतिक और व्यवहारिक अनुसंधान के विस्तार के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि मक्का पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) इसे देश का भाविष्य का अनाज बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाली होनी चाहिए।
आईसीएआर ने एक बयान में कहा, ‘‘इस कार्यशाला में, देश के विभिन्न मौसमों और कृषि-पारिस्थितिकी में जारी करने के लिए उपयुक्त मक्के की आठ नयी संकर किस्मों की पहचान की गई है।’’
इस अवसर पर, किसानों, उद्योगों और अन्य अंशधारकों के फायदे के लिए 'मक्का’ नामक एक द्विभाषी मोबाइल ऐप की पेशककश की गयी।
मक्का महत्वपूर्ण फसल है।इसका उपयोग भोजन के अलावा स्टार्च उद्योगों में, पोल्ट्री और पशु आहार के लिए और कच्चे माल के रूप में किया जाता है। मक्का से हरित ईंधन (इथेनॉल) भी तैयार किया जा सकता है। इसकी खेती देश के सभी राज्यों में की जाती है।
स्वीट मक्का, बेबी कॉर्न और पॉपकॉर्न बहुत लोकप्रिय हैं।
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