चंडीगढ़, 15 जुलाई बागी अकाली नेताओं ने सोमवार को ‘शिरोमणि अकाली दल सुधार लहर’ की शुरूआत की, जिसका लक्ष्य 103 साल पुराने संगठन को मजबूत करना है।
इन नेताओं का यह भी कहना है कि मौजूदा नेतृत्व के तहत पार्टी की मौजूदा स्थिति संकेत देती है कि इसका ‘‘अस्तित्व खतरे में है।’’
पिछले महीने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग ने शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ बगावत कर दी थी और मांग की थी कि हालिया लोकसभा चुनाव में पंजाब में अकाली दल को मिली हार के बाद उन्हें पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
बगावत करने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व सांसद चंदूमाजरा, पूर्व एसजीपीसी (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) प्रमुख बीबी जागीर कौर, पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला, पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका, परमिंदर सिंह ढींडसा, सरवन सिंह फिल्लौर और सुरजीत सिंह रखड़ा तथा पार्टी के नेता सुच्चा सिंह छोटेपुर शामिल हैं।
बागी अकाली नेताओं ने सोमवार को पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला को इस मंच का संयोजक नियुक्त किया।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वडाला ने कहा, ‘‘हम शिरोमणि अकाली दल सुधार लहर शुरू करने जा रहे हैं। हम सभी पंजाबियों और पंथ समर्थक लोगों से इस आंदोलन में हमारा साथ देने का अनुरोध करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम अकाली दल का उत्थान और इसे मजबूत करना चाहते हैं। हम पार्टी को मजबूत देखना चाहते हैं। पार्टी की वर्तमान में जो स्थिति है, उससे लगता है कि अकाली दल का अस्तित्व खतरे में है।’’
अकाली दल में ‘‘कॉरपोरेट कार्यशैली’’ लाने के लिए बादल पर निशाना साधते हुए वडाला ने कहा कि लोगों ने शिअद को खारिज कर दिया और संगठन से दूर हो गए।
वडाला ने कहा कि वे उन नेताओं से भी जुड़ेंगे जिन्हें अतीत में अकाली दल ने निकाल दिया था लेकिन वे इसकी विचारधारा का पालन करते हैं और उन्हें इस आंदोलन में शामिल करेंगे।
वडाला ने कहा कि वे उन प्रमुख नेताओं की जयंती भी मनाएंगे, जिन्होंने पार्टी में बड़ा योगदान दिया और बलिदान दिया।
उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख दिवंगत गुरचरण सिंह टोहरा का जिक्र किया, जिनकी 100वीं जयंती सितंबर में मनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि शिअद के पूर्व अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल की पुण्यतिथि अगस्त में मनाई जाएगी।
वडाला ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पार्टी को झूंदा समिति की रिपोर्ट लागू करनी चाहिए थी, जिसमें मुख्य रूप से नेतृत्व में बदलाव की सिफारिश की गई थी।
शिअद ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के कारणों का विश्लेषण करने के लिए इकबाल सिंह झूंदा नीत समिति गठित की थी।
वडाला ने कहा कि अकाली दल में ‘‘नेतृत्व का संकट’’ है और सिख नेतृत्व में निर्वात की स्थिति है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस शून्य को भरना चाहते हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या बागी नेता कोई बैठक करने के लिए चंडीगढ़ स्थित शिअद कार्यालय जाएंगे, वडाला ने कहा कि पार्टी कार्यालय सभी के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम वहां जबरदस्ती नहीं जाएंगे।’’
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