जरुरी जानकारी | रीयल्टी कंपनियों ने कहा, सर्किल रेट से नीचे नहीं बेच सकते मकान, आयकर कानून में करना होगा बदलाव

नयी दिल्ली, पांच जून जमीन-जायदाद के विकास से जुड़ी रीयल्टी कंपनियों के संगठनों ने कहा है कि देश में फ्लैट या मकान सर्किल रेट (सरकारी दर) से नीचे नहीं बेचा जा सकता क्योंकि आयकर कानून इसकी अनुमति नहीं देता। संगठनों ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बिल्डरों को भारी संख्या में बिनाबिके खाली पड़े मकानों को कम कीमत पर बेचने के आह्वान के जवाब में यह बात कही है।

क्रेडाई (कान्फेडरेशन ऑफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसएिशन ऑफ इंडिया) और नारेडको (नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल) ने कहा कि अगर सौदा मौजूदा सरकारी दर से 10 प्रतिशत या उससे नीचे होता है तो इससे, मकान खरीदारों और डेवलपरों पर कर का बोझ बढ़ेगा।

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सरकारी दर या सर्किल रेट न्यूनतम मूल्य है जो राज्य सरकारें भूखंड, मकान, अपार्टमेंट या वाणिज्यिक संपत्ति बेचने के लिये नियत करती हैं।

बिनाबिके मकानों के दाम में कटौती के सुझाव पर अपनी प्रतिक्रिया में नारेडको के अध्यक्ष नीरंजन हीरानंदानी ने कहा, ‘‘अगर दाम तय दर से 10 प्रतिशत से अधिक घटाये जाते हैं, खरीदारों और बिल्डरों पर अतिरिक्त कर बोझ पड़ेगा।’’

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क्रेडाई के चेयरमैन जे शाह ने कहा कि कमजोर मांग से रीयल एस्टेट की स्थिति खस्ताहाल है। कमजोर मांग का कारण जीएसटी, नया कानून रेरा, नोटबंदी और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) में नकदी संकट तथा मौजूदा कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न बाधाएं हैं।

उन्होंने कहा कि ‘लॉकडाउन’ के बाद कच्चे माल और श्रम की लागत बढ़ी है।

गोयल ने नारेडको के सदस्यों के साथ तीन जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक की थी। बाद में इसका वीडियो ‘लीक’ हुआ जिसमें वह कह रहे हैं कि सरकार यह देख रही है कि क्या सर्किल रेट में कुछ रियायत दी जा सकती है। अगर छूट की अनुमति नहीं मिलती है, बिल्डरों को बिनाबिके मकानों को बेचना होगा।

गोयल ने कहा, ‘‘लेकिन जबतक आप कीमतें कम नहीं करेंगे, मेरा यकीन कीजिए आपके मकान पड़े रहेंगे।’’ उन्होंने कहा कि बिल्डरों को यह चुनना है कि क्या वे अनबिके मकानों और कर्ज भुगतान में चूक के साथ रहना चाहते हैं या फिर जो बड़ी संख्या में खाली पड़े आवास हैं, उसे बेचकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘...अगर आपमें से किसी को यह लगता है कि सरकार आपको सहायता देगी जिससे आप इसे लंबे समय तक रखे और बाजार सुधरने का इंतजार करे। लेकन बाजार में जल्दी सुधार नहीं होने जा रहा...बेहतर होगा आप इसे बेचे।’’

क्रेडाई और नारेडको दोनों ने आयकर कानून में संशोधन की मांग की है।

उनका यह भी कहना है कि सर्किल रेट वास्तविकता और बाजार दर के अनुसार होना चाहिए।

शाह ने कहा, ‘‘अगर कुछ डेवलपर चुनिंदा शहरों में लागत कम करना चाहते हैं तो वे ऐसा नहीं कर पाते। इसका कारण मौजूदा आयकर कानून में खामियां हैं।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को मांग को गति देने के लिये जीएसटी दर, स्टांप शुल्क और मकान के कर्ज पर ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए।

हीरानंदानी ने कहा कि उनका संगठन तकनीकी समस्या को हटाने की मांग करता रहा है और उसे इस बारे में जवाब का इंतजार है।

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