मुंबई, छह जून भारतीय बैंकिंग जगत ने शुक्रवार को रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में चरणबद्ध कटौती की रिजर्व बैंक की घोषणा का शुक्रवार को स्वागत करते हुए कहा कि इन मौद्रिक उपायों से ऋण वृद्धि में तेजी आएगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रेपो दर को 0.50 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत पर लाने और सीआरआर में एक प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की।
सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा कि आरबीआई का यह नीतिगत कदम ‘सक्रिय, अभिनव, लीक से हटकर और अप्रत्याशित’ था।
भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के भी प्रमुख शेट्टी ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण वृद्धि में संभावित मंदी से जुड़ी सभी चिंताओं पर ‘व्यापक रूप से विचार’ किया है।
शेट्टी ने कहा, “यह नीति निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों, विशेषकर बैंकिंग और वित्त के लिए सकारात्मक है। विशेष रूप से उधार लेने की कम लागत किसी भी अनिश्चितता के लिए एक संतुलनकारी कारक के रूप में कार्य करेगी।”
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अशोक चंद्र ने कहा कि आरबीआई के नीतिगत कदम मूल्य और वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा, “मुद्रास्फीति में कमी आने और व्यापक आर्थिक संकेतकों में मजबूती दिखाने के साथ, यह नीतिगत कदम ऋण उठाव को समर्थन देगा, निवेशक भावना को बढ़ावा देगा और भारत की वृद्धि गति को और मजबूत करेगा।”
इंडियन ओवरसीज बैंक के एमडी एवं सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘रेपो दर को 0.50 प्रतिशत घटाकर 5.50 प्रतिशत करने और सीआरआर को चार चरणों में एक प्रतिशत कम करने का निर्णय एक मजबूत तथा समय पर नीतिगत बदलाव को दर्शाता है जो मूल्य स्थिरता के साथ वृद्धि को संतुलित करने के अनुरूप है।’’
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