जरुरी जानकारी | आरबीआई ने एआरसी से ऋण वसूली की निष्पक्ष आचार संहिता अपनाने को कहा

मंबई, 16 जुलाई भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) से निदेशक मंडल से मंजूरी प्राप्त न्यायसंगत आचार संहिता अपनाने को कहा, ताकि अन्य बातों के अलावा ऋण वसूली के मामले में असभ्य, गैरकानूनी और संदिग्ध व्यवहार के इस्तेमाल को रोका जा सके।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि संहिता से परिचालन में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

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एआरसी बैंकों के फंसे हुए ऋणों को खरीदते हैं और उनकी वसूली करते हैं।

आरबीआई ने कहा, ‘‘हितधारकों से निपटने में पारदर्शिता और निष्पक्षता के उच्चतम मानकों को अपनाने के लिए परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों को उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित साफ सुथरी स्पष्ट आचार संहिता (एफपीसी) लागू करने की सलाह दी जाती है।’’

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इसके लिए न्यूनतम विनियामक अपेक्षा निर्धारित की है, जबकि प्रत्येक एआरसी का बोर्ड इस संबंध में अपने दायरे को बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि एफपीसी में सही तरीके का पालन किया जाना चाहिए, और बोर्ड को इसके उचित कार्यान्वयन में खुद को शामिल करना चाहिए।

इसमें कहा गया कि एआरसी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण में पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण प्रथाओं का पालन करेंगे।

एफपीसी के लिए दिशानिर्देशों के अनुसार बकाए के भुगतान के बाद एआरसी को गारंटी के रूप में दिए गए सभी दस्तावेजों को वापस करना चाहिए।

इसमें कहा गया है, ‘‘एआरसी यह सुनिश्चित करेगा कि रिकवरी एजेंटों को संवेदनशीलता के साथ उनकी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए ठीक से प्रशिक्षित किया जाए। खासतौर से कॉलिंग की जानकारी, ग्राहक की जानकारी की गोपनीयता जैसे पहलुओं के संबंध में।’’

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रिकवरी एजेंट असभ्य, गैरकानूनी और संदिग्ध व्यवहार न करे और वसूली के लिए कर्जदार का उत्पीड़न न करें।

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