देश की खबरें | राजकोट अग्निकांड: एसआईटी ने रिपोर्ट सौंपी, खामियां पाईं; गुजरात पुलिस अधिनियम में बदलाव का सुझाव

अहमदाबाद, 21 जून राजकोट गेम जोन में 25 मई को आग लगने की घटना की जांच के लिए गुजरात सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शुक्रवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट गांधीनगर में गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी को सौंप दी। इस घटना में 27 लोगों की मौत हो गई थी।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुभाष त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने 100 पन्नों की अपनी अंतरिम रिपोर्ट में गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 33 में कुछ बदलावों का सुझाव दिया है। संबंधित धारा स्थानीय पुलिस को ऐसे गेम जोन को विभिन्न लाइसेंस प्रदान करने का अधिकार देती है।

त्रिवेदी ने कहा, "हमने आज सरकार को एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। हमने पुलिस, अग्निशमन विभाग, नगर नियोजन और सड़क एवं भवन विभाग की ओर से खामियां पाईं। हमने उनकी लापरवाही के बारे में प्रासंगिक सबूत एकत्र किए हैं और अपनी रिपोर्ट के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।"

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एसआईटी ने गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 33 में कुछ बदलावों का सुझाव दिया है, जिसके तहत स्थानीय पुलिस ऐसी मनोरंजन सुविधाओं के लिए परिसर लाइसेंस और टिकट लाइसेंस देती है। हम दोषियों को नहीं बख्शेंगे। एसआईटी जांच अभी भी जारी है।’’

गेम जोन में लगी आग को लेकर गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई किए जाने के दौरान 13 जून को वरिष्ठ अधिवक्ता अमित पांचाल ने सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों का हवाला देते हुए पीठ को सूचित किया था कि राजकोट के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, राजकोट के नगर निगम आयुक्त और जिला विकास अधिकारी टीआरपी गेम जोन के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे।

मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल ने तब सरकार को फटकार लगाई थी और पूछा था कि टीआरपी गेम ज़ोन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने वाले इन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

आरोपों के बारे में पूछे जाने पर त्रिवेदी ने कहा कि ये अधिकारी इसके खुलने के करीब एक साल बाद वहां गए थे।

त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हम पहले ही चार आईएएस और एक आईपीएस अधिकारी से पूछताछ कर चुके हैं, जिन्होंने विगत में गेम जोन का दौरा किया था और वहां तस्वीरें खिंचवाई थीं। इन अधिकारियों ने एसआईटी को बताया कि वे मार्च 2022 में अपने परिवार के सदस्यों के साथ एक अधिकारी का जन्मदिन मनाने के लिए वहां गए थे। यह गेम ज़ोन का उद्घाटन कार्यक्रम नहीं था, जैसा कि दावा किया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि जांच पूरी करने से पहले जरूरत पड़ने पर एसआईटी अन्य आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी।

गेम जोन में 25 मई को लगी भीषण आग में बच्चों सहित 27 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस की जांच में पता चला कि गेम जोन राजकोट नगर निगम के अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना चल रहा था।

घटना के बाद, राज्य सरकार ने आग के कारणों, प्रणाली में खामियों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का सुझाव देने के लिए त्रिवेदी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था।

पुलिस ने घटना के सिलसिले में अब तक गेम जोन के पांच मालिकों और छह सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।

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