जयपुर/नयी दिल्ली, 26 जुलाई राजस्थान में सरकार बचाने की चुनौती का सामना कर रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नीत मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई को विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को संशोधित प्रस्ताव भेजा है।
इस बीच, कांग्रेस डिजिटल अभियान के जरिये अपने नेता का समर्थन कर रही है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर दबाव बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की उसकी योजना है।
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उच्चतम न्यायालय में कांग्रेस नीत राजस्थान सरकार के मामले की सुनवाई के एक दिन पहले, राज्य की राजधानी जयपुर में रविवार को शांतिपूर्ण स्थिति नजर आई और राज्यपाल कलराज मिश्र ने शीर्ष अधिकारियों के साथ कोरोना वायरस संकट पर बैठक की।
राजस्थान और उसके बाहर कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में गहलोत का समर्थन किया है और केंद्र सरकार एवं भाजपा पर हमला किया। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस के संकट पर भी अलग समीक्षा बैठक की।
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राजस्थान कांग्रेस ने सोमवार को राजभवन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने के आह्वान को वापस ले लिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ट्वीट किया, ‘‘कल 'लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ' अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता राजभवनों के सामने प्रदर्शन करेंगे, लेकिन हम राजस्थान में ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे। ’’
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक शनिवार रात विधानसभा सत्र के लिए गहलोत मंत्रिमंडल द्वारा पारित संशोधित प्रस्ताव के एजेंडे में महामारी और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा और विधेयकों को पारित कराने का उल्लेख किया गया है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों द्वारा कांग्रेस के खिलाफ बागी तेवर अपना लिए जाने के बाद से गहलोत सरकार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इसी के मद्देनजर गहलोत राज्यपाल पर विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका देने के लिये दबाव बना रहे है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संशेाधित प्रस्ताव में शक्तिपरीक्षण का उल्लेख है या नहीं।
गहलोत ने देर शाम ट्वीट किया, ‘‘ सामान्यत: होता यह है कि विपक्ष हमेशा मांग करता है, सत्ताधारी पार्टी अनिच्छुक रहती है, ... (लेकिन) यहां हम मांग कर रहे है...जिसका अभी तक जवाब नहीं आया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि राज्यपाल बहुत पुराने राजनीतिज्ञ है, मिलनसार, व्यवहार कुशल हैं और उनके पद की बहुत बड़ी गरिमा है। यह संवैधानिक पद है.. वह शीघ्र ही हमें आदेश देंगे, हम विधानसभा का सत्र बुलायेंगे।’’
राजस्थान में 200 सदस्यों वाली विधानसभा में 19 असंतुष्ट विधायकों सहित कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 72 विधायक हैं।
राज्यपाल कलराज मिश्र ने शुक्रवार को विधानसभा सत्र बुलाने के लिये राज्य सरकार से छह बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। उससे पहले राजभवन में कांग्रेस विधायकों ने पांच घंटे तक धरना दिया था। बाद में धरना खत्म हो गया था लेकिन मिश्र ने कहा कि वह संविधान के अनुसार चलेंगे न कि दबाव में आयेंगे।
मिश्र ने गहलोत से स्पष्टीकरण के साथ दोबारा प्रस्ताव भेजने को कहा था।
विधानसभा सत्र बुलाने पर गतिरोध जारी रहने के बीच राजभवन ने एक बयान में कहा कि एक जुलाई से कोविड-19 के मामले तीन गुणा बढ़ गये हैं और उसने निर्देश दिया कि इस महामारी की रोकथाम के लिए गंभीर प्रयास किये जाएं । रविवार को राजस्थान में कोविड के मामले 1,132 बढ़ कर कुल 36,430 हो गये।
इस बीच,नयी दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग कर रही है लेकिन राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं और केंद्र के कथित इशारे पर विश्वास प्रस्ताव में देरी कर रहे हैं।
उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसलों और परिपाटियों का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल अपनी मर्जी से काम नहीं कर सकते और वह केवल मंत्रिमंडल की सलाह पर काम कर सकते हैं।
पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया , ‘‘ भारत का लोकतंत्र संविधान के आधार पर जनता की आवाज़ से चलेगा। भाजपा के छल-कपट के षड्यंत्र को नकार कर देश की जनता लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करेगी।’’
वहीं, गहलोत ने ट्वीट किया, ‘‘आज पूरा मुल्क चिंतित है क्योंकि लोकतंत्र खतरे में है। लोकतंत्र के लिए आवाज उठाओ कार्यक्रम जो चलाया गया इसके मायने हैं, इसका अपना सन्देश है, उसको एक तरफ आम जनता को भी समझना पड़ेगा और दूसरी तरफ जो हुकूमत में हैं उनको भी समझना पड़ेगा।आज जिस प्रकार का माहौल देश के अंदर है वो चिंताजनक है।’’
इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां ने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा, ‘‘ सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को।’’
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