उत्तरकाशी (उत्तराखंड), तीन जुलाई भूधंसाव और मकानों में दरारें पड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गांव के लोगों की परेशानी बारिश ने और बढ़ा दी है। शनिवार को हुई वर्षा के दौरान मस्ताड़ी गांव के ग्रामीण भय के कारण रातभर जागते रहे।
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मस्ताड़ी गांव के निवासियों की सूचना पर शनिवार देर रात नायब तहसीलदार के नेतृत्व में त्वरित प्रतिक्रिया दल मौके पर पहुंचा तथा स्थिति का जायजा लिया।
मस्ताड़ी के ग्राम प्रधान सत्यनारायण सेमवाल ने बताया कि वर्ष 1991 में आए भूकंप के बाद से गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है, लेकिन शासन स्तर पर गांव की सुध नहीं ली जा रही है।
सेमवाल ने कहा कि भूकंप से मस्ताड़ी गांव में दरारें पड़ने और भूस्खलन होने की सूचना पर 1997 में उसका भूविज्ञानियों ने सर्वेक्षण किया था और ग्रामीणों को विस्थापित करने तथा वहां सुरक्षा संबंधी कार्य करने के सुझाव भी दिए थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि शनिवार की रात वर्षा के कारण मस्ताड़ी गांव में लोगों के घरों में आंगन से लेकर रास्तों तक में दरारें और अधिक चौड़ी हो गईं। एक ग्रामीण चंद्रमोहन का आंगन का बड़ा हिस्सा भूधंसाव की जद में आ गया जबकि अन्य ग्रामीणों के मकानों में दरारें बढ़ गईं।
भूस्खलन से घरों की सुरक्षा दीवार और खेतों के पुश्ते भी ढह रहे हैं। सेमवाल ने बताया कि कई ग्रामीणों के मकानों के अंदर से पानी निकल रहा है जबकि जमीन के अंदर से भी पानी की आवाज आ रही है जिससे ग्रामीण दहशत में हैं।
उत्तरकाशी जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर गांव की भूमि की तीन बार भूगर्भीय जांच हो चुकी है। उन्होंने कहा कि गांव में पानी का रिसाव भूमि के अंदर से ही हो रहा है जिसकी जांच के लिए शासन स्तर पर एक टीम भेजने का अनुरोध किया गया है।
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