देश की खबरें | रेलवे ने विवादास्पद जर्मन ब्रेक वाली ट्रेन में निर्धारित गति सीमा का पालन करने का निर्देश दिया

नयी दिल्ली, 19 फरवरी रेलवे ने रविवार को अपने विभिन्न जोन को निर्देश दिया कि वे लोको पायलट को विवादास्पद ‘जर्मन ब्रेकिंग सिस्टम’ से लैस ट्रेन में निर्धारित गति सीमा का पालन करने का निर्देश दें।

एक दिन पहले एक प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि सुल्तानपुर में टक्कर होने का कारण दोषपूर्ण ‘ब्रेक सिस्टम’ हो सकता है।

इसने विभिन्न जोन को लोको पायलट की ब्रेकिंग तकनीक की निगरानी करने का भी निर्देश दिया है।

जर्मन निर्मित ‘बोगी माउंटेड ब्रेक सिस्टम’ (बीएमबीएस) से लैस मालगाड़ियों से जुड़ी कई शिकायतों और दुर्घटनाओं के बाद, रेलवे जोन को पिछले साल ट्रेन की अधिकतम गति को निर्धारित करने का निर्देश दिया गया था।

उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के दक्षिणी केबिन के पास बृहस्पतिवार को दो मालगाड़ियों की आपस में टक्कर हो गई थी।

एक प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटना में शामिल ट्रेन में से एक ट्रेन 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही थी, जिसमें नीचे की ओर ढाल थी और ब्रेक में खामियां थीं।

एसपीएडी (सिग्नल पास्ड ऐट डेंजर) के बढ़ते मामलों को देखते हुए रेलवे ने रविवार को विभिन्न जोन के लिए एक महीने का सुरक्षा अभियान शुरू करने का निर्देश जारी किया।

रेलवे बोर्ड के आदेश में कहा गया है, ‘‘प्रत्येक दुर्घटना उसके किसी न किसी पहलू को लेकर लापरवाही दिखाती है। इसे देखते हुए, 19.02.2023 से तुरंत एक महीने का सघन सुरक्षा अभियान शुरू किया जाना है।’’

आदेश में कहा गया है, ‘‘विभिन्न प्रकार के लोड के लिए एलपी (लोको पायलट) की ब्रेकिंग तकनीक की विशिष्ट निगरानी की जानी चाहिए। कर्मचारियों की ड्यूटी के निर्धारित घंटों से अधिक कार्य करने से थकान हो सकती है और इसे रोका जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एलपी और एएलपी (सहायक लोको पायलट) को पर्याप्त विश्राम दिया जाये।’’

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