देश की खबरें | राहुल ने रायबरेली में की पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात, 2027 के विस चुनाव की तैयारी का आग्रह किया

रायबरेली (उप्र), 21 फरवरी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे के दूसरे दिन पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनसे संगठन को मजबूत करने तथा 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू करने का आग्रह किया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भुएमऊ में गांधी से मुलाकात की और उन्हें विभिन्न मुद्दों, खासकर दलितों से संबंधित मुद्दों से अवगत कराया।

रायबरेली में कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील कुमार गौतम ने कहा कि समुदाय का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सुबह गांधी से उनके भुएमऊ स्थित आवास पर मिला।

गौतम ने कहा, ‘‘हमने अनुसूचित जाति के लोगों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की और उन्हें राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से सामने आई कठिनाइयों के बारे में बताया।”

गौतम ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, ‘‘ सबसे बड़ी चिंता यह है कि नगर निकायों में कार्यरत वाल्मीकि समुदाय के सफाई कर्मचारी अब भी बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं, जो उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।’’

गौतम ने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें प्रेरित किया और पार्टी संगठन को मजबूत करते हुए 2027 के चुनावों के लिए जोरदार तैयारी करने की जरूरत पर जोर दिया।

रायबरेली कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सर्वोत्तम कुमार मिश्रा ने गांधी के नेतृत्व की प्रशंसा की और कहा कि उनकी "ईमानदारी, दूरदर्शिता व कार्य नैतिकता वर्णन से परे है।”

मिश्रा ने यह भी दावा किया कि बिहार चुनाव से पहले गांधी देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

बैठक के बाद मिश्रा ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता की बात ध्यान से सुनी और उनकी चिंताओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।

राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को रायबरेली का अपना दो दिवसीय दौरा शुरू किया। उनके कार्यक्रम में दलित युवाओं से चर्चा, पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और ऊंचाहार के जगतपुर में 1857 के विद्रोह के नायक राणा बेनी माधव सिंह की प्रतिमा का अनावरण शामिल है।

अपने दौरे के दूसरे दिन राहुल ने 1857 की क्रांति के नायक वीरा पासी और भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बी आर आंबेडकर की नरपतगंज स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

दोपहर बाद उन्होंने लालगंज में 'युवा संवाद' में भाग लिया, जहां उन्होंने युवाओं से बातचीत की, बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रकाश डाला और इसके लिए सरकार की आलोचना की।

इसके बाद उन्होंने लालगंज में मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री संयंत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने जोर देकर कहा कि "रेलवे भारत की जीवन रेखा है और सरकार को इसे यात्रियों के लिए सुरक्षित व आरामदायक बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

उन्होंने कोच निर्माण के संबंध में फैक्ट्री के महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्रा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। बाद में गांधी सड़क मार्ग से लखनऊ और फिर दिल्ली के लिए रवाना हुए।

शुक्रवार को अपने दौरे के दूसरे दिन गांधी 1857 के विद्रोह के नायक वीरा पासी के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और शाम को युवाओं से चर्चा करेंगे। इस बीच, रायबरेली के कुछ इलाकों में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के विरोध वाले पोस्टर नजर आए।

इन पोस्टर में गांधी पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती और दलित समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया गया है।

पोस्टरों में मायावती के खिलाफ कांग्रेस नेता उदित राज के हालिया बयान का संदर्भ दिया गया है। पोस्टर में लिखा है, ‘‘ राहुल गांधी, आपके दोहरे मापदंड स्पष्ट हैं। एक तरफ आप दलितों के हितैषी होने का दिखावा करने के लिए अनुसूचित जाति के छात्रावासों और वीरा पासी के स्मारकों का दौरा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ आपकी पार्टी के नेता दलित ‘हस्ती’ और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती का गला घोंटने की अपनी मंशा खुलेआम जाहिर करते हैं।"

‘बहुजन स्वाभिमान मंच’, उत्तर प्रदेश के हवाले से लिखे गए इस संदेश में कहा गया है, "यह पूरे दलित समुदाय का अपमान है। इसके लिए माफी मांगें, नहीं तो दलित समाज आपको सबक सिखाएगा।"

इससे पहले कांग्रेस नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी तथाकथित ‘डबल इंजन’ सरकार को पूरी तरह विफल और ‘इंजन रहित’ सरकार करार दिया।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर बेरोजगारी और महंगाई को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगाया और निजीकरण की दिशा में केंद्र के कदम की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सत्ता में आती है, तो वह कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों की तरह रोजगार के अवसर सृजित करेगी।

अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दूसरे दिन लालगंज इलाके में युवाओं से बातचीत करते हुए गांधी ने कहा, “यह ‘डबल इंजन’ वाली सरकार नहीं है; बल्कि यह बिना इंजन वाली सरकार है।”

गांधी ने कहा, ''जनता महंगाई और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, फिर भी सरकार के पास कोई ठोस समाधान नहीं है।"

उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि नोटबंदी ने छोटे कारोबारियों को खत्म कर दिया और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधार उन्हें सहारा देने में विफल रहा।

उन्होंने कहा,"युवाओं ने पढ़ाई की, लेकिन वे अब भी बेरोजगार हैं क्योंकि (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी लागू की, जिसने छोटे कारोबारियों को खत्म कर दिया। भ्रष्टाचार, अदाणी, अंबानी- आपको इनके बीच के संबंध को समझने की जरूरत है। अगर आपको रोजगार चाहिए, तो पहला कदम छोटे कारोबारियों को पुनर्जीवित करना और उनकी रक्षा करना है। जीएसटी में बदलाव की जरूरत है। जब तक बैंक आपके लिए अपने दरवाजे नहीं खोलेंगे, तब तक रोजगार संभव नहीं होगा।"

गांधी ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बढ़ते निजीकरण पर भी बात की।

उन्होंने कहा, "आम लोगों के लिए बुनियादी सेवाएं मुश्किल होती जा रही हैं। निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन अगर डिग्री रोजगार नहीं देती, तो यह कागज के बेकार टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं है। इसी तरह, निजी अस्पतालों में इलाज कराना आम आदमी के लिए मुश्किल होता जा रहा है।"

उन्होंने सरकार पर आर्थिक असमानता बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "आम नागरिक अपनी जरूरतों पर जीएसटी देते हैं, लेकिन अमीर उद्योगपति उसी अनुपात में कर नहीं देते। यह स्पष्ट अन्याय है। हाल ही में अंबानी की शादी में 10 करोड़ रुपये की घड़ी देखी गई, यह पैसा कहां से आ रहा है?’’

भाजपा के शासन पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने लोगों से कांग्रेस शासित राज्यों से तुलना करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "कर्नाटक में कांग्रेस सरकार क्या कर रही है, इसे देखिए। मुझे यह कहते हुए दुख होता है कि उत्तर प्रदेश में देश की सबसे विफल सरकार है। ये लोग काम करना नहीं जानते। महंगाई और बेरोजगारी दो सबसे बड़े मुद्दे हैं। तथाकथित 'डबल इंजन' वाली सरकार वास्तव में बिना इंजन वाली सरकार है। यह एक विफल सरकार है। उन्हें हटाएं और कांग्रेस को सत्ता में लाएं, फिर आप देखेंगे कि कर्नाटक और तेलंगाना की तरह ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।"

गांधी ने सरकार पर विश्वविद्यालयों का निजीकरण करने और आरक्षण को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए अवसर और सीमित हो गए हैं।

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