देश की खबरें | क्यूएस प्रमुख ने जी20 देशों के बीच सर्वोच्च प्रदर्शन सुधार के लिए भारत की सराहना की

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल क्यूएस के अध्यक्ष नुंजियो क्वाक्वेरेली ने कहा है कि भारतीय विश्वविद्यालयों ने इस साल सभी जी20 देशों के बीच प्रदर्शन में सबसे ज्यादा सुधार दिखाया है जो उनकी औसत रैंकिंग में साल-दर-साल 14 प्रतिशत का महत्वपूर्ण सुधार है।

लंदन स्थित उच्च शिक्षा विश्लेषण फर्म क्वाक्वेरेली साइमंड्स (क्यूएस) द्वारा घोषित प्रतिष्ठित रैंकिंग में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को भारत में सर्वोच्च रैंक वाले विश्वविद्यालय के रूप में पहचाना गया। विकास अध्ययन के लिए विश्वविद्यालय को विश्व स्तर पर 20वें स्थान पर रखा गया।

विषय के आधार पर क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग की घोषणा इस महीने की शुरुआत में की गई थी, जिसमें आईआईएम-अहमदाबाद व्यवसाय और प्रबंधन अध्ययन के लिए वैश्विक स्तर पर शीर्ष 25 संस्थानों में शामिल था, जबकि आईआईएम-बैंगलोर और आईआईएम-कलकत्ता शीर्ष 50 संस्थानों में शामिल थे।

इसने कहा, "इस वर्ष, भारतीय विश्वविद्यालयों ने सभी जी20 देशों के बीच उच्चतम सुधार (उनकी औसत रैंकिंग में साल-दर-साल 14 प्रतिशत का महत्वपूर्ण सुधार) का प्रदर्शन किया। अनुसंधान परिणाम के मामले में, भारत दुनिया के सबसे तेजी से विस्तार करने वाले अनुसंधान केंद्रों में से एक बन गया है।"

क्यूएस अध्यक्ष ने कहा कि 2017 से 2022 तक, भारत के अनुसंधान उत्पादन में 54 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि हुई जिससे यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अनुसंधान उत्पादक बन गया।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत अब 55 क्यूएस विषय रैंकिंग में से 44 में प्रमुख स्थान पर है। कंप्यूटर विज्ञान, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान, व्यवसाय अध्ययन और भौतिकी सहित अन्य में असाधारण प्रदर्शन देखा गया।’’

क्वाक्वेरेली ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की उच्च शिक्षा की प्रगति को निस्संदेह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 जैसी दूरदर्शी नीतियों से मदद मिली है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात को याद किया जहां दोनों ने वैश्विक उच्च शिक्षा मुद्दों पर चर्चा की थी।

क्यूएस अध्यक्ष ने कहा, "हमारी दिलचस्प बातचीत के दौरान, यह स्पष्ट था कि प्रधानमंत्री मोदी के पास भारतीय शिक्षा में क्रांति लाने की एक भावुक प्रतिबद्धता है, जो एनईपी के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों में परिलक्षित होती है।’’

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