चंडीगढ़, 10 मार्च दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को पंजाब में पारंपरिक दलों कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल से मोहभंग करते हुए बारी-बारी राज्य में सरकार बनाने की कड़ी को भी तोड़ दिया। इसके लिए चुनाव प्रचार के दौरान आप ने लगातार मतदाताओं से बदलाव की गुहार लगायी थी।
पंजाब विधानसभा चुनाव में 90 से अधिक सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही आप के राष्ट्रीय संयोजक ने पार्टी की जीत को ''क्रांति'' करार दिया है।
पंजाब में जीत के साथ ही आम आदमी पार्टी पूर्ण राज्य का दर्जा वाले प्रदेश की बागडोर संभालेगी। आम आदमी पार्टी की दिल्ली में भी सरकार है जोकि एक केंद्र शासित प्रदेश है।
पारंपरिक दलों से जनता के मोहभंग को भुनाते हुए चुनाव प्रचार के दौरान आप ने प्रतिद्वंद्वी दलों पर राज्य को लूटने का आरोप लगाते हुए बदलाव का अनुरोध किया था।
ऐसा जान पड़ता है कि पार्टी का नारा ''इक मौका भगवंत मान ते केजरीवाल नूं'' मतदाताओं को भा गया था। आम आदमी पार्टी ने विद्यालयों और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के जरिए पंजाब में दिल्ली के शासन मॉडल को लागू करने की बात भी कही।
आप ने मतदाताओं को लुभाने के लिए महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये, 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और 24 घंटे बिजली आपूर्ति जैसे वादे भी किए।
इसके अलावा, चुनाव से पहले भगवंत मान को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश करने का लाभ भी आम आदमी पार्टी को मिला।
आप ने 2014 के लोकसभा चुनाव में चार सीट जीतकर पहली बार पंजाब में चुनावी दस्तक दी। यह जीत ऐसे समय में मिली, जब भाजपा ने पूरे देश में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि, आप 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और 20 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी।
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