उच्च न्यायालय में अहमदाबाद नगर निगम के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर
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अहमदाबाद, 10 मई दूध और दवा को छोड़कर अन्य सामान की बिक्री पर रोक लगाने को लेकर अहमदाबाद नगर निगम द्वारा छह मई को जारी आदेश को गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।

हर्षित शाह नामक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि इससे किराने और सब्जी की दुकानों पर भीड़ हुई और सामाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन हुआ।

याचिकाकर्ता ने कहा कि अहमदाबाद नगर निगम को पाबंदी लगाने से पहले लोगों को आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए था। उन्होंने अदालत ने अनुरोध किया कि वह संबंधित प्राधिकार को इस तात्कालिक फैसले से पड़े नकारात्मक असर के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी तय करने के लिए निर्देश दे।

यह जनहित याचिका ऑनलाइन दायर की गई है और इसपर जल्द सुनवाई होने की संभावना है।

याचिका में कहा गया, ‘‘अहमदाबाद नगर निगम ने छह मई को शाम पांच बजे आदेश जारी किया कि आधी रात से शहर में दूध और दवा को छोड़कर किसी अन्य सामान की बिक्री नहीं होगी और लोगों को किराने का सामान और सब्जी खरीदने के लिए महज दो घंटे का समय दिया क्योंकि केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार दुकानों को सुबह सात बजे से लेकर शाम सात बजे तक ही खोला जा सकता है।’’

याचिका के मुताबिक, ‘‘ कम समय की वजह से बड़ी संख्या में लोग आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए घर से बाहर निकल आए जिससे किराने और सब्जी की दुकानें पर सामाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करते हुए लंबी कतारें लग गई। उस दो घंटे की वजह से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की आशंका कई गुना तक बढ़ गई, जो नगर निगम के आदेश के उद्देश्यों के विपरीत था।

याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे वकील नील लखानी ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से दायर की गई याचिका पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि शनिवार रात तक अहमदाबाद जिले में 5,540 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है जबकि 363 लोगों की अबतक मौत हो चुकी है।

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