नयी दिल्ली, 24 अप्रैल आयुष मंत्रालय ने कोविड-19 की रोकथाम और चिकित्सकीय प्रबंधन में स्वदेशी वैकल्पिक औषधि प्रणाली की भूमिका का मूल्यांकन करने के लिए शुक्रवार को अल्पकालिक अनुसंधान प्रस्ताव आमंत्रित किए।
कोरोना वायरस के मामलों के प्रबंधन में शामिल अस्पतालों और संस्थानों को इस योजना में शामिल होने के लिए बाह्य अनुसंधान श्रेणी (जो आयुष मंत्रालय प्रतिष्ठान से बाहर हैं) में आमंत्रित किया गया है।
इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘अब तक आयुष प्रणालियों को कोविड-19 के मरीजों का उपचार करने की अनुमति नहीं है क्योंकि कोई ऐसा साक्ष्य नहीं है जो यह कहता हो कि आयुष के पास कोई समाधान है। इसलिए, यह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रस्ताव रोग नियंत्रण और सार्स-कोव-2 संक्रमण तथा कोविड-19 महामारी के चिकित्सकीय प्रबंधन में आयुष के अंतर्गत देखभाल/औषधियों की भूमिका और प्रभाव के मूल्यांकन से संबंधित होने चाहिए।
संस्थागत आचार समिति की स्वीकृति से युक्त अधिकतम छह महीने की अवधि वाले परियोजना प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा जिसमें आयुष चिकित्सकों, तकनीकी श्रमशक्ति, प्रयोगशाला जांच और संबंधित चीजों पर होने वाले खर्च के लिए 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
अर्हता मापदंडों सहित पूरा विवरण और ओवदन फॉर्म आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने आयुष चिकित्सकों का आह्वान किसा था कि वे महामारी से निपटने के लिए पारंपरिक औषधियों से वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित समाधान देने संबंधी कार्य करें।
आयुष में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियां शामिल हैं।
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