(गुंजन शर्मा)
कोटा (राजस्थान), 29 दिसंबर कोटा में एक महीने में चार छात्रों की मौत से चिंतित विशेषज्ञों ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी के लिए अपने बच्चों को कोचिंग केंद्र कोटा भेजने वाले माता-पिता से आग्रह किया है कि वे उन्हें यहां भेजने से पहले उनकी काउंसलिंग करें।
कोटा में आत्महत्या के हालिया मामलों पर नजर रख रहे विशेषज्ञों एवं मनोचिकित्सकों ने कहा कि बच्चों को कोचिंग केंद्र भेजने से पहले उनकी पेशेवर योग्यता जांच कराई जानी चाहिए, मानसिक रूप से उन्हें मजबूत करना चाहिए और उन्हें रोजमर्रा के कामों के अनुसार ढलने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों को बिना किसी तैयारी के प्रशिक्षण के लिए कोटा भेज देते हैं और उनका ध्यान केवल वित्तीय एवं साजो सामान की व्यवस्था करने पर होता है।
हाल में कोचिंग संस्थानों के चार छात्रों की आत्महत्या की घटना ने उन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में फिर से एक बहस छेड़ दी है, जो अक्सर अधिक पाठ्यक्रम और परिवार की अपेक्षाओं का दबाव झेल नहीं पाते।
‘एलन करियर इंस्टीट्यूट’ के प्रिंसिपल काउंसलर और छात्र व्यवहार विषय के विशेषज्ञ हरीश शर्मा ने कहा कि अधिकतम माता-पिता अपने बच्चों को लगभग शून्य तैयारी के साथ कोटा भेजते हैं और उनका ध्यान केवल वित्तीय एवं सामान की व्यवस्था करने पर होता है।
शर्मा ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘जब कोई बच्चा पांचवीं या छठी कक्षा में पढ़ रहा होता है, तभी माता-पिता तय कर लेते हैं कि दो साल या चार साल बाद उसे कोटा भेज दिया जाएगा। वे उसी के अनुसार बचत करना शुरू कर देते हैं या पहले से ही शहर जाने की योजना बनाना शुरू कर देते हैं, लेकिन वे कभी पेशेवर रूप से यह विश्लेषण करने की कोशिश नहीं करते कि क्या उनका बच्चा वास्तव में ऐसा करना चाहता है या वह ऐसा करने में सक्षम भी है या नहीं।’’
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