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देश की खबरें | गुजरात दंगों पर बीबीसी वृत्तचित्र पर रोक के फैसले के मूल रिकॉर्ड पेश करें: न्यायालय ने केंद्र से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित बीबीसी के वृत्तचित्र पर पिछले वर्ष प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले से जुड़े मूल रिकॉर्ड तीन सप्ताह के भीतर पेश करे।

देश की खबरें | गुजरात दंगों पर बीबीसी वृत्तचित्र पर रोक के फैसले के मूल रिकॉर्ड पेश करें: न्यायालय ने केंद्र से कहा

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित बीबीसी के वृत्तचित्र पर पिछले वर्ष प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले से जुड़े मूल रिकॉर्ड तीन सप्ताह के भीतर पेश करे।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली वरिष्ठ पत्रकार एन. राम, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, मानवाधिकार कार्यकर्ता वकील प्रशांत भूषण और वकील एमएल शर्मा की याचिका पर केंद्र को याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उसके बाद दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। न्यायालय ने मामले की अंतिम सुनवाई जनवरी, 2025 में निर्धारित की है।

पीठ ने कहा, "इस मामले पर विचार करने की आवश्यकता है। इसका निपटारा 10 मिनट में नहीं किया जा सकता है।"

साथ ही पीठ ने केंद्र से कहा कि वह फैसले के मूल रिकॉर्ड पेश करने को लेकर न्यायालय के फरवरी 2023 के निर्देश का पालन करने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने जवाब दाखिल नहीं किया है और इसके लिए दो सप्ताह का समय चाहिए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी यू सिंह ने मेहता के अनुरोध पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकार जानती है कि उसे जवाब दाखिल करना है, लेकिन उसने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

सिंह ने कहा कि यह एक कार्यकारी निर्णय है और अदालत केंद्र द्वारा जवाब दाखिल किए बिना भी आगे बढ़ सकती है।

हालांकि, न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि अदालत को मामले में केंद्र का जवाब देखने की जरूरत है।

तीन फरवरी, 2023 को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को अपने फैसले से संबंधित मूल रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था और विभिन्न याचिकाओं पर नोटिस जारी किये थे।

सिंह ने तब कहा कि सरकार ने वृत्तचित्र पर रोक के लिए ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021’ के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था।

याचिकाकर्ताओं में से एक ने आरोप लगाया कि "इंडिया : द मोदी क्वेश्चन" नामक वृत्तचित्र पर प्रतिबंध "दुर्भावनापूर्ण, मनमाना और असंवैधानिक" था।

वृत्तचित्र का पहला एपिसोड 17 जनवरी को प्रसारित हुआ था, जबकि दूसरा भाग 24 जनवरी को प्रसारित हुआ था।

सरकार ने 21 जनवरी, 2023 को विवादास्पद वृतचित्र के लिंक साझा करने वाले कई यूट्यूब वीडियो और ट्विटर पोस्ट को ब्लॉक करने के निर्देश जारी किए थे।

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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 21, 2024 08:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).