देश की खबरें | स्वस्थ, हरित विश्व के लिए समान स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें : डब्ल्यूएचओ

नयी दिल्ली, छह अप्रैल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सबके लिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए कदम तेज करने का आह्वान किया है ताकि कल्याणकारी समाजों का निर्माण किया जा सके। वैश्विक निकाय ने जलवायु परिवर्तन को मानवता के सामने सबसे बड़ा खतरा बताया है।

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि जलवायु कारणों से हर साल करीब 1.3 करोड़ लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से अरबों लोगों के स्वास्थ्य, कल्याण और सतत विकास को खतरा है।

उन्होंने कहा, “यह बीमारी से संबंधित रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने में दशकों की प्रगति को रोकता है। हमें मनुष्यों और हमारे ग्रह को स्वस्थ रखने के लिए अभी कार्य करना चाहिए।”

डब्ल्यूएचओ के एक बयान के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से 2030 और 2050 के बीच सालाना 2,50,000 अतिरिक्त मौत होने की आशंका है।

विश्व स्वास्थ्य निकाय ने सरकारों और लोगों से विश्व स्वास्थ्य दिवस 2022 की थीम ‘हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य’ की रक्षा के लिए उपाय करने का आग्रह किया।

बयान में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र, जहां दो अरब से अधिक लोग रहते हैं, जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और यहां इसके कारण होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक है।

इसमें कहा गया कि तीव्र वर्षा, बार-बार बाढ़, जंगल की आग और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सूखा पहले से ही स्वास्थ्य और आजीविका को प्रभावित कर रहा है और वैश्विक स्तर पर तथा इस क्षेत्र में भारी पीड़ा, मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों, मौतों और विस्थापन का कारण बन रहा है।

बढ़ते तापमान से संक्रामक रोग, ‘हीट स्ट्रोक’, आघात और यहां तक कि अत्यधिक गर्मी से मौत भी हो रही है। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी फसल की बर्बादी कुपोषण और अल्पपोषण को बढ़ा रही है।

डब्ल्यूएचओ के बयान में कहा गया, वहीं वायु प्रदूषण करने वाले प्रदूषक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल रहे हैं। वैश्विक स्तर पर 90 प्रतिशत से अधिक लोग प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, जिसके कारण हर साल 70 लाख लोगों की मौत होती है, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में 24 लाख लोगों की मौत भी शामिल है।

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