देश की खबरें | राष्ट्रपति मुर्मू का संसद में पहला अभिभाषण, सदस्यों ने उपलब्धियां गिनाने पर थपथपायी मेज

नयी दिल्ली, 31 जनवरी देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपना पहला अभिभाषण हिंदी में दिया और महिलाओं, पिछड़ों सहित समाज के विभिन्न वर्गों एवं देश के प्रमुख मुद्दों पर सरकार का मत सामने रखा। उनके अभिभाषण में सरकार की 50 से अधिक उपलब्धियां गिनाये जाने पर सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया।

राष्ट्रपति मुर्मू के करीब एक घंटे (64 मिनट) के, पहले अभिभाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने 180 से अधिक बार मेज थपथपायीं।

इससे पहले राष्ट्रपति भवन से घुड़सवार दस्ते एवं अंगरक्षकों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने वाहन से संसद भवन पहुंचीं। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा एवं राज्यसभा के महासचिवों ने उनकी आगवानी की।

राष्ट्रपति के अभिभाषण से पहले राष्ट्र गान की धुन बजाई गयी। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने अपना अभिभाषण पढ़ा। बाद में उप राष्ट्रपति धनखड़ ने अभिभाषण के शुरूआती एवं अंतिम अंश का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ा।

अभिभाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, उच्च सदन के नेता पीयूष गोयल, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अनेक केंद्रीय मंत्री एवं सांसद मौजूद थे।

राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी केंद्रीय कक्ष में अगली कतार में अकेले बैठी थीं।

‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ के समापन समारोह में हिस्सा लेने जम्मू कश्मीर गए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के कई अन्य सांसद अभिभाषण के अवसर पर संसद में उपस्थित नहीं हो सके क्योंकि खराब मौसम के कारण श्रीनगर से उनकी उड़ानों में विलंब हो गया।

विपक्षी दलों में द्रमुक के टी आर बालू, तृणमूल कांग्रेस के संदीप बंदोपाध्याय, डेरेक ओब्रायन, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला आदि केंद्रीय कक्ष में अभिभाषण के दौरान मौजूद थे।

राष्ट्रपति ने जब स्वाधीनता सेनानी तथा ओडिया की सुप्रसिद्ध कवियत्री ‘उत्कल भारती’ कुंतला कुमारी साबत की ‘नारी-शक्ति’ नामक कविता का उल्लेख किया तब सदस्यों ने मेज थपथपायी।

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