फ्रांस के दक्षिणपंथी और वामपंथी सांसदों ने पिछले सप्ताह ऐतिहासिक अविश्वास प्रस्ताव पर एक साथ मिलकर मतदान किया था, जिसके कारण प्रधानमंत्री माइकल बार्नियर और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा था।
मैक्रों के मध्यमार्गी गठबंधन में महत्वपूर्ण साझेदार 73 वर्षीय बायरू दशकों से फ्रांसीसी राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं। उनके राजनीतिक अनुभव को देश में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नेशनल असेंबली में किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है।
मैक्रों ने पिछले सप्ताह अपने कार्यकाल के अंत तक (2027) पद पर बने रहने का संकल्प जताया था।
मैक्रों के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि बायरू को ‘‘नयी सरकार बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।’’
उम्मीद है कि बायरू आने वाले दिनों में नए मंत्रियों के चयन के लिए विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। यह कार्य चुनौतीपूर्ण प्रतीत होता है, क्योंकि मैक्रों के मध्यमार्गी गठबंधन के पास संसद में बहुमत नहीं है और बायरू के मंत्रिमंडल को सत्ता में बने रहने के लिए वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों पक्ष के उदारवादी सांसदों पर निर्भर रहना होगा।
कुछ रूढ़िवादियों के नयी सरकार का हिस्सा बनने की उम्मीद है।
बायरू को हाल में यूरोपीय संसद के धन के गबन के आरोप वाले मामले में बरी कर दिया गया था।
बायरू फ्रांसीसी जनता के बीच तब लोकप्रिय हुए जब वह 1993 से 1997 तक सरकार में शिक्षा मंत्री रहे थे। वह तीन बार 2002, 2007 और 2012 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे थे।
एपी
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